बिहार के कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड में गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से ग्रामीण इलाकों में भारी तबाही मच गई है। बाढ़ का पानी कई गांवों और सरकारी विद्यालयों में तेजी से घुस गया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन करना पड़ रहा है।
बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र और जनजीवन पर असर
गंगा नदी की बाढ़ ने अमदाबाद प्रखंड के कई ग्रामीण इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। मुख्य सड़क मार्ग के डूबने और संपर्क टूटने के कारण आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है।
- तीन गांवों के लगभग 10,000 लोग बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं।
- सड़कें पानी में डूबने के कारण आवाजाही के लिए अब केवल नाव ही एकमात्र सहारा बची है।
- बच्चों की पढ़ाई, बाजार और जरूरी सेवाओं पर भी इसका गहरा असर पड़ा है।
सरकारी स्कूलों में भी घुसा बाढ़ का पानी
बढ़ते जलस्तर ने केवल रिहायशी इलाकों को ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों को भी प्रभावित किया है, जिससे प्रशासन के दावों और शरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
- बाढ़ का पानी सरकारी विद्यालयों के अंदर तेजी से घुस गया है।
- जिन परिवारों के घरों में पानी भर गया था, उन्होंने सरकारी स्कूलों में शरण ली थी, लेकिन वहां भी पानी पहुंचने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
- कभी बच्चों की पढ़ाई का केंद्र रहे स्कूल अब बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए अस्थायी ठिकाना बने हुए हैं, लेकिन वहां भी खतरा मंडराने लगा है।
ग्रामीणों की समस्याएं और प्रशासन का निरीक्षण
बाढ़ पीड़ितों को भोजन, पेयजल और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं का भारी संकट झेलना पड़ रहा है, और ग्रामीण प्रशासन से त्वरित राहत व बचाव कार्य शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने अमदाबाद प्रखंड की जलमग्न पंचायतों का निरीक्षण किया है और स्थिति का जायजा लेते हुए सरकारी सहायता जल्द पहुंचाने का भरोसा दिलाया है। ग्रामीण अब पूरी तरह प्रशासन की मदद और राहत कार्यों पर टिके हुए हैं, ताकि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।


0 टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले टिप्पणी करें।