देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सियासी तपिश लगातार बढ़ती जा रही है। विपक्षी दलों के 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मिलने का समय मांगा था। हालांकि, सीजेआई ने विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से साफ इनकार कर दिया और इसके पीछे के कारणों की जानकारी भी दी।
सीजेआई द्वारा मुलाकात से इनकार किए जाने के बाद देश में नया सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस और शिवसेना (UBT) समेत अन्य विपक्षी दलों ने जहां इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एनडीए के नेताओं ने विपक्ष पर न्यायपालिका पर अनुचित राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
सीजेआई ने मिलने से किया इनकार, कहा- कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें विपक्ष का पत्र मिला था और उन्होंने रात में ही इसका जवाब भेज दिया था। उन्होंने पत्र में कुछ स्पष्ट कारण बताते हुए मिलने में अपनी असमर्थता व्यक्त की है।
इसके साथ ही सीजेआई ने कहा:
- सुप्रीम कोर्ट के द्वार देश के हर नागरिक के लिए हमेशा खुले हैं।
- चाहे कोई आम नागरिक हो या किसी निर्वाचित संस्था का माननीय सदस्य, वह अपनी याचिका लेकर कोर्ट आ सकता है।
- भारत के प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार प्राप्त है कि वह कानून के तहत अपनी समस्या रखे और न्यायालय नियमों के अनुसार उसकी सुनवाई करेगा।
विपक्ष का तीखा रुख: 'जनता संकट में है और CJI मिलने को तैयार नहीं'
सीजेआई के इनकार पर विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद कर्मवीर बौद्ध ने कहा कि उनका यह दायित्व बनता है कि वे सुप्रीम कोर्ट जाकर अपना प्रतिवेदन दें और विपक्ष का प्रतिनिधिमंडल हर हाल में अपना ज्ञापन सौंपेगा। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि मुलाकात न करने का विशेषाधिकार सीजेआई के पास हो सकता है, लेकिन ज्ञापन देने का अधिकार पूरे देश की जनता को है। उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि देश की जनता का मार्च है।
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इस फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा:
- विपक्ष ने सीजेआई से मिलने की गुहार लगाई थी और शाम का समय मिलने की बात सामने आई थी, जिसे अचानक रद्द कर दिया गया।
- सीजेआई का यह कहना कि उन्हें राजनीतिक दलों के डेलिगेशन से मिलने का अधिकार नहीं है, देश की जनता को हैरान करने वाला है।
- देश की जनता इस समय संकट में है और मुख्य न्यायाधीश विपक्ष से मिलने को तैयार नहीं हैं।
वहीं राजद सांसद सुधाकर सिंह ने अलग राय व्यक्त करते हुए कहा कि सीजेआई के समक्ष पहले से ही चुनाव आयुक्त की शक्तियों और एसआईआर (SIR) को लेकर याचिकाएं लंबित हैं, ऐसे में कोर्ट को तारीख पर तारीख देने के बजाय जल्द सुनवाई पूरी करनी चाहिए।
भाजपा और एनडीए का पलटवार: 'न्यायपालिका पर दबाव बनाने की बचकानी कोशिश'
विपक्ष के इस कदम पर भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने तीखा प्रहार किया है। एनडीए नेताओं का आरोप है कि विपक्ष न्यायपालिका जैसी स्वतंत्र संस्था पर राजनीतिक दबाव बनाने का अनुचित प्रयास कर रहा है।
सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने विपक्ष को घेरते हुए कहा:
- सड़क पर प्रदर्शन और उपद्रव करने के बाद अब राहुल गांधी और विपक्षी नेता मुख्य न्यायाधीश के दरवाजे पर ज्ञापन देने जा रहे हैं।
- देश की सर्वोच्च अदालत कोई राजनीतिक रैली या भाषण का मंच नहीं है।
- इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ कि न्यायपालिका से जुड़े मसलों पर इस तरह सीधे तौर पर समय मांगकर दबाव की राजनीति की जाए।


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