दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और एसआईआर (SIR) की मांगों को लेकर आयोजित 'CJP 2.0' प्रोटेस्ट के दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की सख्ती देखने को मिली। 10 अक्टूबर को प्रस्तावित इस प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली और कनॉट प्लेस के आसपास के इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया गया, जिससे आम नागरिकों और प्रदर्शनकारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
'द जनपथ न्यूज़' की पत्रकार शाज़िया निसार ने मौके से जानकारी साझा करते हुए बताया कि राजधानी में जगह-जगह बैरिकेडिंग और सुरक्षा बलों की तैनाती के चलते स्थिति कोरोना काल के लॉकडाउन जैसी प्रतीत हो रही थी।
कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर पर छावनी जैसा माहौल
प्रोटेस्ट स्थल जंतर-मंतर और उसके आसपास के जनपथ मार्केट तथा कनॉट प्लेस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ-साथ सीआरपीएफ (CRPF) और बीएसएफ (BSF) की टुकड़ियां तैनात की गई थीं। सड़कों पर रूट डायवर्ट किए गए थे और अधिकतर बाजार बंद नजर आए।
- तिलक नगर, राजौरी गार्डन, कीर्ति नगर और करोल बाग जैसे इलाकों के मार्गों पर कड़ी चेकिंग और बैरिकेडिंग रही।
- कनॉट प्लेस और आसपास के कई किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं ठप रहीं या जैमर्स के कारण नेटवर्क काम नहीं कर रहा था।
- पत्रकारों को भी केवल पीआईबी (PIB) मान्यता कार्ड के आधार पर ही आगे जाने की अनुमति की बात कही जा रही थी, जिससे कवरेज में बाधा आई।
प्रदर्शनकारियों और छात्रों को हिरासत में लिया गया
दूर-दराज के राज्यों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहुंचे युवा और छात्रों को मुख्य स्थल तक पहुंचने ही नहीं दिया गया। जैसे ही लोग बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास या कनॉट प्लेस के बाहरी हिस्सों में एकत्रित होने लगे, पुलिस ने उन्हें बसों में भरकर हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
- महज 5 से 7 मिनट के भीतर कई बसों में प्रदर्शनकारियों को भरकर थाने भेजा गया।
- हिरासत में लिए गए लोगों में 15 वर्ष तक के स्कूली छात्र भी शामिल थे, जो अपने अधिकारों की मांग को लेकर पहुंचे थे।
- कनॉट प्लेस थाने के अंदर से छात्राओं और अन्य प्रदर्शनकारियों द्वारा मेडिकल जांच की मांग और चोटें लगने की शिकायतें सामने आईं।
- शाज़िया निसार ने पुलिस द्वारा युवतियों और छात्रों के साथ की गई अत्यधिक सख्ती और जबरन हिरासत के तरीके पर मानवीय आधार पर सवाल उठाए।
CJP नेतृत्व की अनुपस्थिति और 'प्लान-बी' पर उठे सवाल
पत्रकार ने CJP के शीर्ष नेताओं और मुख्य चेहरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब अभिजीत दीपके, सौरव दास और ध्रुव राठी जैसे लोगों को पहले से अंदेशा था कि उन्हें नजरबंद या हिरासत में लिया जा सकता है, तो युवाओं की सुरक्षा के लिए कोई बैकअप रणनीति क्यों नहीं बनाई गई।
नेतृत्व की अनुपस्थिति के कारण छात्र नेतृत्वविहीन होकर पुलिस कार्रवाई का शिकार बने। कानूनी सहायता या मार्गदर्शन के अभाव में गरीब परिवारों से आए युवा मुश्किल में पड़ गए। हालांकि हिरासत में लिए गए लोगों को कुछ समय बाद छोड़ दिया गया और कोई गंभीर मामला दर्ज नहीं हुआ, लेकिन CJP 2.0 प्रदर्शन जमीनी स्तर पर विफल नजर आया।


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