सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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रिहाई के बाद सीजेपी नेताओं का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, कहा- '1975 से भी बदतर आपातकाल जैसे हालात'
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रिहाई के बाद सीजेपी नेताओं का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, कहा- '1975 से भी बदतर आपातकाल जैसे हालात'

दिल्ली के प्रेस क्लब में सीजेपी (CJP) नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास ने पुलिस हिरासत से रिहाई के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के दमन और दिल्ली को छावनी में तब्दील करने की कड़ी निंदा की।

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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी (CJP) के नेताओं ने पुलिस हिरासत से छूटने के बाद केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोला। सीजेपी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास ने आरोप लगाया कि देश में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने पहुंचे नागरिकों के साथ बर्बरता की जा रही है और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है।

नेताओं ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में देश के हालात 1975 के आपातकाल से भी ज्यादा गंभीर और चिंताजनक बना दिए गए हैं, जहां चुनिंदा मुद्दों पर सवाल उठाने वाले प्रदर्शनकारियों को जबरन हिरासत में लिया जा रहा है।

फ्लाइट से हिरासत और गैर-मानवीय व्यवहार का आरोप

आशुतोष रांका ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें, सौरव और अन्य साथियों को फ्लाइट के अंदर घुसकर जबरन हिरासत में लिया गया। उन्होंने दिल्ली पुलिस के रवैये को अमानवीय बताते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को उनके परिजनों से बात तक नहीं करने दी जा रही थी।

  • नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली लैंड करते ही विमान की सीढ़ियों पर पुलिस पहुंच गई और उन्हें जबरन ले जाया गया।
  • प्रदर्शन में शामिल साथी अभिजीत (दीपके) की दादी के निधन के बाद भी पुलिस द्वारा संवेदनहीनता दिखाने और मामले का तमाशा बनाने का आरोप लगाया गया।
  • सीजेपी की ओर से शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की गई और अभिजीत के आंदोलन में डटे रहने के हौसले की सराहना की गई।

'चुनाव आयोग के खिलाफ लड़ाई को सरकार ने अपने खिलाफ बनाया'

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के खिलाफ था, लेकिन सरकार ने इसे सीधे अपने ऊपर ले लिया।

उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जो सवाल आयोग से पूछे जा रहे थे, सरकार ने आयोग का बचाव करते हुए प्रदर्शनकारियों पर ही कार्रवाई शुरू कर दी। नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई अब और तेज होगी और 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आंदोलन को लेकर उनका रुख स्पष्ट है।

दिल्ली को छावनी बनाने और जनता को परेशान करने पर सवाल

सीजेपी नेता सौरव दास ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि पूरी दिल्ली में खुले तौर पर आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी गई है। उन्होंने सरकार द्वारा उठाए गए सुरक्षा कदमों को आम नागरिकों के खिलाफ युद्ध जैसा करार दिया।

  • नक्सल प्रभावित इलाकों, बंगाल, कश्मीर और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से 30 से 40 हजार सुरक्षा बलों को एयरलिफ्ट कर दिल्ली में तैनात किया गया।
  • शहर भर में नाकाबंदी कर 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद किया गया और राजधानी एक्सप्रेस समेत सैकड़ों ट्रेनें रद्द की गईं।
  • रविवार के दिन बाजार और दुकानें बंद करवाकर आम जनता के मन में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की गई।

सौरव दास ने कहा कि सरकार की यह गलतफहमी है कि वह आम नागरिकों को असुविधा पहुंचाकर आंदोलन को बदनाम कर देगी। उन्होंने दावा किया कि जनता सब देख रही है और यह आंदोलन केवल एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं और नागरिकों के अधिकारों का आंदोलन है, जिसमें वे मजबूती से जुड़े रहेंगे।

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