दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा की गई बैरिकेडिंग, हिरासत, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियों और इंटरनेट सेवाओं में रुकावट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर की जाने वाली कार्रवाई कानून के तय दायरे में होनी चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
11 अक्टूबर को सामने आए निर्देशों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को हिरासत की प्रक्रिया, आवाजाही और संचार सेवाओं के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। साथ ही अदालत ने वकीलों और पत्रकारों के काम में बाधा न डालने को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
सुप्रीम कोर्ट के अहम निर्देश
अदालत ने प्रशासन की कार्रवाइयों की सीमा तय करते हुए कई प्रमुख निर्देश दिए हैं:
- कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी भी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जा सकता।
- मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होनी चाहिए, जब तक कि सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान की गंभीर आशंका न हो।
- इंटरनेट सेवाओं को कानून के तहत निर्बाध रखा जाए ताकि लोगों और यातायात की आवाजाही प्रभावित न हो।
- पत्रकारों और वकीलों को अपने पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोका जाना चाहिए।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक याचिका पर नोटिस भी जारी किया है, जिसमें संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कथित अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई थी।
तीन नेताओं को मिली सशर्त रिहाई
शनिवार को दिल्ली पहुंचने के बाद पुलिस हिरासत में लिए गए तीन प्रमुख चेहरों को रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत से रिहाई मिल गई। हालांकि, यह रिहाई बिना शर्त नहीं है।
- रिहा होने वालों में सीजेपी के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हैं।
- तीनों को एक वर्ष तक शांति और अच्छे व्यवहार की शर्त पर 50,000 रुपये का मुचलका भरने का निर्देश दिया गया।
क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे मामले की जड़ में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी का विरोध प्रदर्शन है। संगठन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठा रहा है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी और पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। व्यापक सुरक्षा पाबंदियों के बाद रविवार को मेट्रो स्टेशन फिर से खुले और इंटरनेट सेवाएं बहाल हुईं, लेकिन प्रदर्शन और सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।


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