सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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दिल्ली में CJP का भारी विरोध प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और छात्र नेताओं की रिहाई के बाद गरमाई सियासत
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दिल्ली में CJP का भारी विरोध प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और छात्र नेताओं की रिहाई के बाद गरमाई सियासत

दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग और कनॉट प्लेस इलाके में छात्र और युवाओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद हिरासत में लिए गए CJP नेताओं को रिहा किया गया, जिसके बाद प्रेस क्लब में नेताओं ने सरकार पर तानाशाही के गंभीर आरोप लगाए।

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देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर (SIR) को वापस लेने की मांग को लेकर छात्र और युवा संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बाबा खड़क सिंह मार्ग और कनॉट प्लेस क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए भारी पुलिस बल और आरएएफ (RAF) की तैनाती की गई थी, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की देखने को मिली।

इस पूरे घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप किए जाने और अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए जाने के बाद हिरासत में लिए गए प्रमुख छात्र नेताओं को रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस वार्ता में नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाए।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें और आरोप

प्रदर्शन में दिल्ली सहित हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश से बड़ी संख्या में पहुंचे युवाओं ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे उठाए:

  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा लिया जाए।
  • एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को पूरी तरह से रद्द और रोलबैक किया जाए।
  • मतदाता सूची से कथित तौर पर काटे गए 13 करोड़ नामों को पुन: बहाल किया जाए।
  • शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का लोकतांत्रिक अधिकार दिया जाए।

पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की धरपकड़

पुलिस प्रशासन द्वारा धारा 163 लागू होने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया। भारी संख्या में दिल्ली पुलिस, महिला पुलिस बल और आरएएफ के जवानों ने बैरिकेडिंग और ह्यूमन चेन बनाकर छात्रों को रोका और बसों में भरकर डिटेन किया। इस दौरान मीडियाकर्मियों को भी रिपोर्टिंग करने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने से रोकने की कोशिश की गई। छात्राओं और अन्य प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग और बदसलूकी करने के आरोप लगाए।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और कानूनी रुख

प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए कई अहम निर्देश जारी किए:

  • शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना अवैध हिरासत में न लिया जाए।
  • वकीलों और पत्रकारों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने से न रोका जाए।
  • मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित रखा जाए और लोगों की आवाजाही बाधित न हो।
  • इंटरनेट सेवाओं को कानून सम्मत तरीके से बहाल रखा जाए।

अदालत ने अधिकारियों के खिलाफ कथित अवमानना की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस भी जारी किया है, हालांकि यह स्पष्ट किया गया कि नोटिस जारी होना अवमानना साबित होना नहीं है।

CJP नेताओं की रिहाई और प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर आरोप

रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के बाद CJP के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा किया गया। रिहाई 50,000 रुपये के मुचलके और एक वर्ष तक शांति व अच्छे व्यवहार की शर्त पर दी गई।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें एयरपोर्ट पर फ्लाइट से जबरन उठाया और डिटेन किया गया। उन्होंने दिल्ली में 30 से 40 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, 57 मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों को बंद किए जाने की तुलना 1975 की इमरजेंसी से करते हुए कहा कि सरकार अपने ही नागरिकों के खिलाफ युद्ध जैसी स्थिति बना रही है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका यह लोकतांत्रिक आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

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