देश की राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में युवाओं और छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में शहीद भगत सिंह की तस्वीर और बैनर लिए प्रदर्शनकारी 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारों के साथ आगे बढ़े। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और खींचतान देखने को मिली।
पुलिस प्रशासन द्वारा प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने के बावजूद देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा इस मार्च में शामिल होने पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई महिला और पुरुष प्रदर्शनकारियों को जबरन हिरासत में लेकर बसों में भर दिया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन में शामिल संगठनों और युवाओं ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सरकार व चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोला। प्रदर्शनकारियों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें सामने रखीं:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से तत्काल इस्तीफा दें।
- एसआईआर (SIR) व्यवस्था को पूरी तरह से रोलबैक यानी वापस लिया जाए।
- कथित रूप से काटे गए करीब 13 करोड़ नागरिकों के वोटों को फिर से बहाल किया जाए।
- वोट के अधिकार और पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार जवाबदेही तय करे।
पुलिस कार्रवाई और हिरासतों का दौर
प्रदर्शन को रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इस दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शन कर रही महिला कार्यकर्ताओं को भी पुलिसकर्मियों द्वारा घसीटते हुए हिरासत में लिया गया और बसों में डाला गया। युवाओं का आरोप था कि तानाशाही रवैया अपनाते हुए सरकार और प्रशासन लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
कठिनाइयों के बावजूद दूर-दराज से पहुंचे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन में भाग लेने के लिए युवा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से लंबी और कठिन यात्रा तय करके दिल्ली पहुंचे थे। मध्य प्रदेश के देवास से आए एक युवा ने बताया कि ट्रेनें रद्द होने के बावजूद वे इंदौर पहुंचे और फिर अतिरिक्त खर्च कर किसी तरह दिल्ली पहुंचे ताकि वे अपने अधिकारों की मांग कर सकें।
वहीं, उत्तर प्रदेश के इटावा से पहुंचे एक घायल प्रदर्शनकारी ने जलियांवाला बाग और हिटलरशाही का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि जनता के वोट के बुनियादी अधिकार को छीना जा रहा है और दिल्ली की सड़कों पर लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।


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