सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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दिल्ली वोटर लिस्ट: 47 लाख से अधिक नाम बाहर, मुस्लिम बहुल सीटों पर कितना असर?
एक्सप्लेनर / विश्लेषण

दिल्ली वोटर लिस्ट: 47 लाख से अधिक नाम बाहर, मुस्लिम बहुल सीटों पर कितना असर?

दिल्ली की नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47,56,000 पुराने मतदाताओं के नाम हटने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। क्या मुस्लिम बहुल सीटों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है? आंकड़ों के जरिए समझें पूरी सच्चाई।

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दिल्ली की वोटर लिस्ट से एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है जिसने सियासत से लेकर आम मतदाता तक सबका ध्यान खींच लिया है। करीब 47 लाख 56 हजार पुराने मतदाताओं के नाम फिलहाल नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं हैं। इस बड़ी संख्या के पीछे कई कहानियां छिपी हैं और सवाल उठ रहा है कि क्या दिल्ली की मुस्लिम बहुल सीटों पर एसआईआर (SIR) का बहुत ज्यादा असर पड़ा है।

दिल्ली SIR: क्या कहता है शुरुआती आंकड़ा

दिल्ली में एसआईआर से पहले वोटर लिस्ट में करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे। नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आने पर इसमें करीब 97.53 लाख नाम ही दिखाई दिए, यानी लगभग 47 लाख 56 हजार पुराने मतदाता ड्राफ्ट रोल में नहीं हैं। मोटे तौर पर समझें तो लगभग हर 3 पुराने मतदाताओं में से 1 का नाम इस ड्राफ्ट सूची में नहीं है, लेकिन ध्यान रखिए कि यह अभी फाइनल लिस्ट नहीं है।

मुस्लिम बहुल 7 सीटों पर क्या रहा हाल?

दिल्ली में 7 विधानसभा क्षेत्रों को मुस्लिम बहुल सीटों के तौर पर देखा जाता है। इन 7 सीटों का आंकड़ा जोड़ने पर एक बड़ी और चौंकाने वाली संख्या सामने आती है:

  • ओखला: 1.64 लाख नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर
  • मुस्तफाबाद: 80,804 नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर
  • बाबरपुर: 55,264 नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर
  • बल्लीमारान: 49,640 नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर
  • चांदनी चौक: 48,405 नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर
  • सीलमपुर: 45,105 नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर
  • मटिया महल: 32,099 नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर

इन सातों सीटों को जोड़ने पर करीब 4,75,000 मतदाता फिलहाल ड्राफ्ट रोल में नहीं हैं। लेकिन ओखला को लेकर सवाल सबसे बड़ा है क्योंकि वहां संख्या ही नहीं बल्कि प्रतिशत भी दिल्ली के औसत (32.8%) से काफी ऊपर (45.3%) है।

प्रतिशत के हिसाब से सबसे ज्यादा असर कहां?

प्रतिशत के हिसाब से देखें तो ओखला नंबर-1 नहीं है। सूची में बदलाव कुछ इस प्रकार है:

  • तुगलकाबाद: 47.85%
  • ओखला: 45.33%
  • कस्तूरबा नगर: 44.03%
  • बदरपुर: 42.67%

मुस्लिम बहुल ओखला का आंकड़ा जरूर सबसे ज्यादा है, लेकिन दिल्ली में सबसे ज्यादा असर तुगलकाबाद में देखा गया है, जो उससे भी ऊपर है।

कुल संख्या के हिसाब से दिल्ली में सबसे ज्यादा नाम कहां बाहर

अगर प्रतिशत नहीं बल्कि कुल संख्या के आधार पर देखें तो पूरी तस्वीर बदल जाती है:

  • बुराड़ी: ~1.67 लाख
  • ओखला: ~1.64 लाख
  • बदरपुर: ~1.47 लाख
  • विकासपुरी: ~1.46 लाख
  • रिठाला: ~1.06 लाख

कुल संख्या में बुराड़ी सबसे ऊपर है, जबकि ओखला दूसरे स्थान पर आता है।

नाम ड्राफ्ट लिस्ट में क्यों नहीं दिख रहे?

47.56 लाख नाम ड्राफ्ट रोल में न होने के संभावित कारण निम्नलिखित हैं:

  • कुछ मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है।
  • कुछ मतदाता जगह बदल चुके हैं।
  • कुछ का रजिस्ट्रेशन दो जगह पर हो सकता है।
  • कई जगहों पर एन्यूमरेशन (Enumeration) और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

यह ड्राफ्ट लिस्ट है, फाइनल लिस्ट नहीं। इसलिए 47.56 लाख लोगों का मतदान अधिकार खत्म होने का अंतिम आंकड़ा इसे नहीं माना जा सकता।

नाम कट गया तो क्या करें?

यदि आपका या किसी परिचित का नाम मतदाता सूची से कट गया है, तो आप इन चरणों का पालन कर सकते हैं:

  • वोटर सर्विस पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन ऐप पर अपना नाम चेक करें।
  • नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 भरें।
  • गलत, मृत, डुप्लीकेट या अपात्र मतदाता के नाम पर आपत्ति के लिए फॉर्म 7 का उपयोग करें।
  • नाम-पत्ता आदि दूसरे विवरण में करेक्शन के लिए फॉर्म 8 भरा जा सकता है।

انتخاب आयोग की हेल्पलाइन 1950 पर बात की जा सकती है, और क्लेम्स व ऑब्जेक्शन के लिए अंतिम तारीख 30 सितंबर है।

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