सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले भारी हंगामा, चुनाव आयोग के खिलाफ उतरे DYFI और SFI कार्यकर्ताओं को पुलिस ने लिया हिरासत में
जन मुद्दे

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले भारी हंगामा, चुनाव आयोग के खिलाफ उतरे DYFI और SFI कार्यकर्ताओं को पुलिस ने लिया हिरासत में

दिल्ली में जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे DYFI और SFI के सैकड़ों छात्र-युवा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर रोक लिया। चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, बेरोजगारी और शिक्षा के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद कई लोगों को बसों में भरकर हिरासत में ले लिया गया।

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गांधी जयंती के अवसर पर राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर के समीप उस वक्त भारी तनाव और हंगामे की स्थिति बन गई, जब डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के सैकड़ों कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मार्च निकालते हुए आगे बढ़े। प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचकर धरना देना चाहते थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम स्थल से करीब 100 से 150 मीटर पहले ही भारी बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया।

पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही बैठकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां, बैनर और लाल-सफेद झंडे थे, जबकि कुछ कार्यकर्ता डफली बजाकर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।

मल्टी-लेवल बैरिकेडिंग और पुलिस की सख्त घेराबंदी

प्रशासन ने जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर मल्टी-लेवल बैरिकेडिंग कर रखी थी ताकि कोई भी प्रदर्शनकारी धरना स्थल तक न पहुंच सके। मौके पर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों की भारी तैनाती की गई थी। यहां तक कि मीडियाकर्मियों की आवाजाही पर भी पाबंदियां लगाई गई थीं।

जब कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की, तो पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए उन्हें पीछे धकेलना शुरू किया। इसके बाद बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष कार्यकर्ताओं को जबरन बसों में भरकर हिरासत में ले जाया गया। हिरासत में लिए जाने के दौरान भी कार्यकर्ता बसों की खिड़कियों से बाहर हाथ निकालकर नारेबाजी और पोस्टर लहराते रहे।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें

प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और सरकारी नीतियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल थे:

  • चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तुरंत इस्तीफा और उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया।
  • चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े वर्ष 2023 के नए कानून को तत्काल रद्द करना।
  • एसआईआर (SIR) व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करना।
  • अखबारों में चुनाव आयोग को लेकर छपे हालिया खुलासों की गहन और निष्पक्ष जांच कराना।
  • सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना और रिक्त सरकारी पदों पर समयबद्ध भर्ती।

केरल और महाराष्ट्र से पहुंचे कार्यकर्ताओं ने उठाए मुद्दे

प्रदर्शन में शामिल होने केरल से आए एक कार्यकर्ता ने कहा कि वे मोदी सरकार के तहत बढ़ती बेरोजगारी, चुनाव आयोग में कथित भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हो रहे हमलों के खिलाफ आवाज उठाने दिल्ली आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।

वहीं, महाराष्ट्र से आए एक अन्य प्रदर्शनकारी ने भावुक होते हुए सरकारी स्कूलों की दुर्दशा का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के कई सरकारी विद्यालयों में बच्चों के लिए पीने का पानी, शौचालय और चारदीवारी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। युवाओं का कहना था कि देश में लाखों सरकारी पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार भर्ती निकालने के बजाय बेरोजगारों की उपेक्षा कर रही है।

सड़क पर बैठकर शुरू किया धरना

जब पुलिस ने आगे बढ़ने की बिल्कुल अनुमति नहीं दी, तो कई कार्यकर्ता वहीं मुख्य सड़क पर धरने पर बैठ गए। कार्यकर्ताओं का कहना था कि गांधी जयंती के दिन जब देश सत्य और अहिंसा की बात करता है, तब शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने आ रहे नागरिकों को धरना देने का संवैधानिक अधिकार भी नहीं दिया जा रहा है। हालांकि, कुछ ही देर में पुलिस ने सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारियों को भी जबरन हटाकर बसों में बैठा लिया और इलाके को खाली कराया।

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