सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में कुछ बदलाव देखे गए हैं। जहां कनॉट प्लेस के कुछ रास्तों पर बैरिकेडिंग हटाकर सामान्य यातायात को बहाल किया गया है, वहीं ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर को अब भी पूरी तरह से कॉर्डन ऑफ यानी छावनी में तब्दील रखा गया है।
जनपथ चौराहे और जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर दिल्ली पुलिस, आरएएफ (RAF) और सीआईएसएफ (CISF) के जवान भारी संख्या में तैनात हैं। आम दिनों में रविवार की रात गुलजार रहने वाले इन इलाकों में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है।
कनॉट प्लेस में राहत, लेकिन जंतर-मंतर अब भी सील
कोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन ने कनॉट प्लेस के कुछ हिस्सों में आवाजाही को सुगम बनाया है, जिससे आम जनता को थोड़ी राहत मिली है। हालांकि जंतर-मंतर जाने वाले तमाम रास्तों पर स्थिति जस की तस बनी हुई है:
- जनपथ रोड से जंतर-मंतर की तरफ जाने वाले रास्ते पर मजबूत बैरिकेडिंग बरकरार है।
- संसद मार्ग, एनडीएमसी चौराहा और अशोक रोड से जुड़े रास्तों को भी पूरी तरह से ब्लॉक किया गया है।
- इलेक्शन कमीशन और संसद मार्ग थाने के आसपास सुरक्षा घेरा बेहद सख्त है और केवल अनुमति प्राप्त वाहनों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।
- सुरक्षा बलों की बसों और जवानों की भारी मौजूदगी के कारण पूरा इलाका किसी छावनी जैसा नजर आ रहा है।
सीजेपी नेताओं की रिहाई और प्रेस कॉन्फ्रेंस
बीते दिनों डिटेंशन का सामना कर रहे सीजेपी के नेताओं को जमानत मिलने के बाद पुलिस हिरासत से छोड़ दिया गया। रिहा होने के बाद उन्होंने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और सरकार व प्रशासन के रुख पर कड़े सवाल उठाए।
सौरभ दास और आशुतोष रांका सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे अपने आंदोलन से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि जनहित और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर उनकी मांगें लगातार जारी रहेंगी और वे पूरे देश में अपनी आवाज उठाते रहेंगे। वहीं अभिजीत दीप अपनी दादी के देहांत के चलते अंतिम संस्कार के लिए रवाना हुए।
लोकतांत्रिक अधिकारों और प्रदर्शन स्थल को लेकर सवाल
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान यह बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि क्या जंतर-मंतर, जिसे वर्षों से विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र माना जाता रहा है, को इस तरह हमेशा के लिए बंद रखा जा सकता है। एसआईआर (SIR) और चुनाव आयोग से जुड़े सवालों को लेकर जनता और छात्रों के बीच बने परसेप्शन पर सरकार और प्रशासन के जवाब का इंतजार है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट में आगामी सुनवाई के दौरान इस मामले और प्रदर्शन स्थल की अनुमति पर क्या फैसला आता है।


0 टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले टिप्पणी करें।