देश की राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों को पुलिस ने पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया है। चुनाव आयोग को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त/चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR से जुड़े मुद्दों पर होने वाले विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने जंतर-मंतर के चारों तरफ सख्त पहरा बैठा दिया है। कनाट प्लेस से आने वाले रास्तों से लेकर संसद मार्ग तक सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है।
प्रशासन द्वारा जंतर-मंतर की तरफ जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर मल्टी-लेवल बैरिकेडिंग लगा दी गई है, जिससे पूरा इलाका पूरी तरह से खाली और सील नजर आ रहा है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ-साथ दमकल गाड़ियां और अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किए गए हैं।
प्रदर्शन का आह्वान और प्रमुख मांगें
जंतर-मंतर पर इस धरने और प्रदर्शन को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों की ओर से आह्वान किया गया था। इस प्रदर्शन के प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं:
- आम आदमी पार्टी (AAP) की नेता आतिशी और पार्टी के अन्य नेताओं द्वारा प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान किया गया था।
- सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों और आइसा (AISA) से जुड़ी नेहा बोरा की ओर से भी लोगों से पहुंचने की अपील की गई थी।
- प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग के हालिया फैसलों पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
- SIR और चुनाव आयोग से जुड़े सवालों को लेकर जनता के बीच उठ रहे मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।
जंतर-मंतर और चुनाव आयोग दफ्तर की किलेबंदी
द जनपथ न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, जंतर-मंतर के साथ-साथ अशोक रोड स्थित निर्वाचन आयोग (Election Commission) के दफ्तर की तरफ जाने वाले रास्ते को भी पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है। संसद मार्ग थाने के पास और गुरुद्वारा बंगला साहिब के पहले वाले चौराहे से ही हर दिशा में बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं ताकि कोई भी वाहन या पैदल व्यक्ति वहां तक न पहुंच सके।
दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड्स पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत चेतावनी वाले बोर्ड भी लगाए हैं, जिनमें किसी भी प्रकार के जमावड़े या प्रदर्शन को गैरकानूनी बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
लोकतंत्र और विरोध प्रदर्शन पर उठते सवाल
धरना स्थल पर सुरक्षा के इस कड़े घेरे को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रशासन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन से इतना डर क्यों है। जंतर-मंतर को चारों तरफ से घेर दिए जाने से ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो धरना स्थल पर किसी भी नागरिक को अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
लोकतंत्र में जब जनता या विपक्षी दलों के मन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते हैं, तो उनके जवाब तलाशने के बजाय प्रदर्शन के अधिकार को ही सीमित करने की कोशिशें क्यों की जा रही हैं, यह एक बड़ा और गंभीर सवाल बना हुआ है।


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