आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मीडिया में आई एक खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि देश में वोटों की चोरी और फर्जीवाड़े के जरिए चुनाव जीते जा रहे हैं। केजरीवाल ने इसे स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया।
केजरीवाल ने कहा कि देश के नागरिकों के मताधिकार का हनन किया जा रहा है और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पूरी तरह से खत्म कर दी गई है। उन्होंने निर्वाचन आयोग की वर्तमान कार्यप्रणाली को असंवैधानिक बताते हुए गंभीर सवाल खड़े किए।
'अकेला व्यक्ति नहीं चला सकता चुनाव आयोग'
अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग किसी एक व्यक्ति की संस्था नहीं है। आयोग तीन लोगों—एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्तों से मिलकर बनता है, जहाँ मुख्य चुनाव आयुक्त 'फर्स्ट अमंग इक्वल्स' होता है। आयोग के सभी फैसले या तो सर्वसम्मति से होते हैं या फिर बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों से ज्ञानेश कुमार अकेले ही पूरे चुनाव आयोग को चला रहे हैं और बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना आदेश जारी किए जा रहे हैं। कई-कई महीनों तक आयोग की बैठकें नहीं बुलाई जा रही हैं और नीचे के अधिकारियों को सीधे निर्देश दिए जा रहे हैं।
अन्य चुनाव आयुक्तों के विरोध पत्रों का दिया हवाला
केजरीवाल ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस मनमानी पर कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
- 28 अक्टूबर 2025 को चुनाव आयुक्त संधू ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर आपत्ति जताई कि बिना पूरे आयोग के अनुमोदन के भारत निर्वाचन आयोग के नाम से आदेश जारी हो रहे हैं।
- 16 अप्रैल 2026 को संधू ने फिर पत्र लिखा कि आईटी मॉड्यूल और पोर्टल्स के संबंध में उन्हें मीडिया से जानकारी मिल रही है, जिसे आयोग की मंजूरी नहीं मिली।
- 16 अप्रैल और 24 अप्रैल को चुनाव आयुक्त जोशी ने भी आधिकारिक पत्राचार बिना आयोग की अनुमति के जारी किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
13 करोड़ वोटों को हटाने और SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल
आप नेता ने दावा किया कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया के जरिए 30 राज्यों के भीतर 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या काटने का अधिकार केवल स्थानीय निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO/SDM) के पास होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वेबसाइट पर ईआरओ का एक्सेस बंद कर दिया गया और दिल्ली में बैठकर सेंट्रलाइज्ड तरीके से वोटर लिस्ट में भारी हेरफेर की गई, जो पूरी तरह गैरकानूनी और असंवैधानिक है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखीं तीन प्रमुख मांगें
अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देश के सामने तीन बड़ी मांगें रखीं:
- एसआईआर (SIR) की पूरी प्रक्रिया को तत्काल रद्द किया जाए, इसके तहत किए गए सभी बदलाव खारिज हों और तीन साल पुरानी वोटर लिस्ट को दोबारा बहाल किया जाए।
- ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाए।
- पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित जिन राज्यों में चुनाव हुए हैं, उन्हें रद्द कर दोबारा चुनाव कराए जाएं।
अंत में केजरीवाल ने कहा कि यह लड़ाई केवल किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश के 140 करोड़ नागरिकों और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने सभी विपक्षी दलों और जनता से इसके खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।


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