सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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नेपाल में महातबाही, यूपी में लाशें! सैकड़ों किलोमीटर बहकर भारत कैसे पहुंची लाशें?
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नेपाल में महातबाही, यूपी में लाशें! सैकड़ों किलोमीटर बहकर भारत कैसे पहुंची लाशें?

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में गंडक नदी से 17 शव बरामद हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि ये शव नेपाल से सैकड़ों किलोमीटर बहकर भारत पहुंचे हैं, जिससे लापता लोगों की पहचान और डीएनए मिलान की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही का असर अब भारत के उत्तर प्रदेश राज्य तक दिखाई देने लगा है। नेपाल से सैकड़ों किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश में बहने वाली गंडक नदी और उससे जुड़े इलाकों में एक के बाद एक शव बरामद हो रहे हैं।

कुशीनगर और महाराजगंज जिलों में अब तक कुल 17 शव मिल चुके हैं, और आशंका जताई जा रही है कि इनमें से कई शव नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में बहकर भारत तक पहुंचे हैं। यह स्थिति न केवल एक आपदा राहत अभियान है, बल्कि यह एक बहुत बड़ा 'मिसिंग पर्सन आइडेंटिफिकेशन' ऑपरेशन भी बन चुका है।

नेपाल से यूपी तक कैसे पहुंचे शव?

नेपाल की पहाड़ियों से निकलने वाली कई नदियाँ आगे चलकर बड़े रिवर सिस्टम का हिस्सा बनती हैं। नेपाल की नारायणी नदी भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक नदी के नाम से आगे बढ़ती है।

  • नेपाल की पहाड़ी इलाकों में हुई तबाही में लोग नदी में बह गए।
  • तेज बहाव ने शवों को सैकड़ों किलोमीटर तक बहाया।
  • नदी सीमा पार कर भारत में प्रवेश करती है और आगे उत्तर प्रदेश-बिहार की तरफ बढ़ती है।
  • तेज बहाव में कोई शव नदी के साथ बहुत दूर डाउनस्ट्रीम तक पहुँच सकता है।

उत्तर प्रदेश में कहां-कहां मिले शव?

नेपाल की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में गंडक नदी बहती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन इलाकों में अब तक कुल 17 शव बरामद हुए हैं:

  • कुशीनगर: 13 शव (खड्डा और तमकुहीराज इलाके में)
  • महाराजगंज: 4 शव (निचलौल क्षेत्र में)

कुशीनगर की डीएम ने बताया कि इनमें से 6 शव जिला अस्पताल में और 7 शव एम्स गोरखपुर में भेज दिए गए हैं, जिन्हें री-फ्रीजरेशन में सुरक्षित रखकर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

पहचान की सबसे बड़ी चुनौती और डीएनए मिलान

सिर्फ शव मिलने का मतलब यह नहीं है कि उनकी पहचान भी हो चुकी है। यह इस कहानी का सबसे संवेदनशील हिस्सा है:

  • नेपाल में लापता हजारों लोगों के परिवार आज भी अपनों का इंतजार कर रहे हैं।
  • समय बीतने के साथ डीकंपोजिशन बढ़ जाता है, जिससे केवल चेहरा देखकर पहचान करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
  • जिन मामलों में तुरंत पहचान संभव नहीं होती, वहां डीएनए सैंपल, फोटोग्राफ्स और अन्य पहचान संबंधी जानकारियां सुरक्षित रखना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।
  • कई मामलों में डीएनए मैच ही एकमात्र सहारा बनता है, जिसके लिए बरियल लोकेशन और फोरेंसिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना जरूरी है।

नेपाल में राहत और तलाश का काम जारी

उधर नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। सुरक्षाकर्मी और रेस्क्यू टीमें अब भी लोगों की तलाश में लगी हैं। मलबे से लेकर प्रभावित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और टनल तक सर्च ऑपरेशन चल रहा है। जैसे-जैसे दिन गुजर रहे हैं, जीवित बचने की उम्मीद कम होती जाती है और रेस्क्यू के साथ रिकवरी की लड़ाई शुरू हो जाती है।

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