ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति और दशा का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। प्रसिद्ध ज्योतिषी गुरुदेव जीडी वशिष्ठ ने एक साक्षात्कार के दौरान विस्तार से बताया कि व्यक्ति की कुंडली के विभिन्न ग्रह उसकी आजीविका, व्यापार और धन प्राप्ति की दिशा तय करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जीवन में सफलता और धन योग किस उम्र में बनते हैं और इसके पीछे कौन से ज्योतिषीय कारक जिम्मेदार होते हैं।
नौ ग्रहों और विभिन्न पेशों का संबंध
गुरुदेव के अनुसार, सभी नौ ग्रह और दो छाया ग्रह मिलकर व्यक्ति को धन प्रदान करते हैं, लेकिन जातक का पेशा यह तय करता है कि उसे किस ग्रह से धन मिल रहा है:
- नौ के नौ ग्रह और दोनों छाया ग्रह पैसा देते हैं, लेकिन आजीविका के आधार पर ग्रहों का प्रभाव अलग होता है।
- नौकरी करने वालों को सूर्य पैसा देता है।
- शोरूम या किराए के व्यापार से जुड़े लोगों को चंद्रमा और बृहस्पति पैसा देते हैं।
- फौज में कार्यरत या बहुत भारी मेहनत का काम करने वालों को मंगल पैसा देता है।
- गल्ले का व्यापार (रोज माल आना और बेचना) करने वालों को बुध पैसा देता है।
- शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने वालों को भी बृहस्पति पैसा देता है।
- सौंदर्य, हॉस्पिटैलिटी, होटल और आतिथ्य व्यापार से जुड़े लोगों को शुक्र पैसा देता है।
- बड़े उद्योगपति और ठेकेदार, जो बहुत से मजदूरों से काम करवाते हैं, उन्हें शनि पैसा देता है।
- टेक्नोलॉजी से जुड़े लोगों को राहु पैसा देता है।
- वफादारी निभाकर और लोगों को खुश करके पैसा कमाने वालों को केतु पैसा देता है।
पैसा न टिकने का कारण और अचूक उपाय
कई लोग पैसा कमाते हैं लेकिन टिकता नहीं है। इसके ज्योतिषीय कारणों पर प्रकाश डालते हुए गुरुदेव ने बताया कि पैसे टिकने का संबंध जन्मकुंडली के चौथे घर से होता है, जिसका मालिक चंद्रमा है:
- यदि कुंडली के चौथे घर में शनि या केतु जैसे पापी ग्रह बैठे हों, तो पैसा नहीं टिकता।
- चौथे घर में पापी ग्रह बैठे होने पर उनकी वस्तुओं का दान करना चाहिए (जैसे शनि के लिए उड़द, काले चने, सरसों का तेल, काला कपड़ा, लोहा; और केतु के लिए सफेद तिल)।
- कुंडली में बृहस्पति सबसे उच्च का ग्रह है।
- जिनका पैसा जमा नहीं हो रहा, वे लगातार 43 दिनों तक 400 ग्राम चने की दाल जल प्रवाह कर सकते हैं, जिससे चौथा घर जागृत होकर पैसे को जमा करने का काम करता है।
धन योग और सफलता की सही उम्र
यह सवाल अक्सर उठता है कि किस उम्र के बाद धन के योग सबसे ज्यादा बनते हैं। गुरुदेव के अनुसार:
- ज्यादातर कामयाब लोग 34 साल की उम्र के बाद ही कामयाब हुए हैं।
- कुछ दुर्लभ मामलों में सफलता 20-24 साल की उम्र में भी मिल जाती है, लेकिन सफलता की उम्र की सामान्य शुरुआत 28 साल है।
- पूरे कामयाब हो चुकने की उम्र 34 साल है।
- जो लोग 34 साल की उम्र तक कामयाब नहीं हुए हैं, उन्हें अपनी जन्म कुंडली जरूर दिखानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि वे कब कामयाब होंगे।
महादशा का खेल: राजा से रंक और रंक से राजा
गुरुदेव ने बताया कि अमीर और गरीब होने का पूरा खेल महादशा का होता है:
- यदि अच्छी महादशा चल रही है, तो वह व्यक्ति को मालोमाल कर देगी।
- यदि बुरी महादशा चल रही है, तो वह कभी कामयाब नहीं होने देगी।
- चंद्रमा, राहु और मंगल की महादशा से अमूमन नुकसान हो सकता है, जबकि बृहस्पति की अच्छी दशा चंद्र, मंगल और राहु को नजरअंदाज करके व्यक्ति को कई गुना बढ़ाकर करोड़ों-अरबों पति बना सकती है।


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