सरकार के मुखिया के तौर पर निरंतर 25 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता जनार्दन और भारतीय लोकतंत्र का आभार व्यक्त किया। 'विकसित भारत संकल्प सभा' में जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर 2001 को जब उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब कभी सोचा नहीं था कि जीवन में यह पड़ाव भी आएगा। उन्होंने इस 25 साल के सफर और अनुभव को देश की सबसे बड़ी पूंजी बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके लिए जनता जनार्दन ही ईश्वर का रूप है और उन्होंने सदैव खुद को एक विद्यार्थी मानकर सेवा कार्य किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक भारत विकसित राष्ट्र नहीं बन जाता, तब तक वे न रुकेंगे, न थकेंगे और न ही अपने कर्तव्य पथ से डिगेंगे।
संकटों ने सिखाया और दायित्वबोध को विस्तार दिया
पीएम मोदी ने अपने बीते 25 वर्षों के अनुभवों और चुनौतियों को याद करते हुए कहा कि उनके जीवन में कोई भी घटना व्यर्थ नहीं गई और हर परिस्थिति ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया है:
- मोरबी की बाढ़: सेवा कार्यों में दिन-रात जुटने और सेवाभाव की प्रेरणा दी।
- कच्छ-भुज का भूकंप: पुनर्निर्माण के लिए हर परिस्थिति में डटे रहने का जज्बा सिखाया।
- चंद्रयान की विफलता: असफलता से उठकर दोबारा खड़े होने और आगे बढ़ने की सीख दी।
- कोरोना महामारी: देश की सामूहिक चेतना और एकजुटता के सामर्थ्य को समझाया।
2014 से पहले और आज के भारत में बड़ा बदलाव
प्रधानमंत्री ने 2014 के दौर की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय देश नीतिगत पंगुता, घोर निराशा और महंगाई से जूझ रहा था, लेकिन पिछले एक दशक में भारत ने हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान रचे हैं:
- भारत 'फ्रेजाइल 5' अर्थव्यवस्था से निकलकर दुनिया की शीर्ष 5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ।
- पहले 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में लगभग 60 साल लगे, जबकि हाल के वर्षों में 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की ग्रोथ जुड़ी।
- मोबाइल फोन आयात करने वाले देश से अब भारत 'मेड इन इंडिया' मोबाइल का प्रमुख निर्यातक बन चुका है।
- 2015 से 2025 के दशक में कृषि विकास दर ने पिछले सभी दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए।
- बीते एक दशक में 25 करोड़ देशवासी गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं।
- जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 की दीवार हटी, नक्सलवाद की कमर टूटी और आतंकवाद को उसके घर में घुसकर मुंहतोड़ जवाब दिया गया।
2047 तक 'विकसित भारत' का रोडमैप
प्रधानमंत्री ने देशवासियों और युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि 1947 में आजादी के लिए देशवासियों ने अपनी जान दी थी, लेकिन अब 2047 के विकसित भारत के लिए हमें देश के लिए जीना होगा। उन्होंने भारत के भविष्य के प्रमुख लक्ष्यों को रेखांकित किया:
- भारत को दुनिया की शीर्ष 3 अर्थव्यवस्थाओं में पहुंचाना।
- भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना और ड्रग्स-फ्री इंडिया का निर्माण करना।
- भारत में ओलंपिक खेलों का सफल आयोजन सुनिश्चित करना।
- अंतरिक्ष मिशन में भारतीय नागरिक को चंद्रमा पर उतारना।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जेनेटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी भविष्य की तकनीकों में विश्व का नेतृत्व करना।
- देश की यूनिवर्सिटीज को दुनिया की टॉप रैंकिंग में शामिल कराना और 'मेड इन इंडिया' पैसेंजर विमान का निर्माण करना।
अंत में गीता के श्लोक 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि निष्काम कर्म ही उनका धर्म है। उन्होंने कहा कि 'राष्ट्र प्रथम' का संकल्प और 'नागरिक देवो भव:' का मंत्र ही उनके जीवन की सबसे बड़ी साधना रहेगा।


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