मथुरा के वृंदावन में विख्यात संत प्रेमानंद महाराज और उनका आश्रम इन दिनों भारी चर्चा और विवादों के केंद्र में है। इस विवाद की मुख्य वजह उनके शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत है, जिसको लेकर लगातार गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
इसी बीच प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने वाले एक शिष्य ने आश्रम के अंदरूनी हालात और व्यवस्था से जुड़े लोगों पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही मथुरा के कई संतों ने भी इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से उच्चस्तरीय व सीबीआई जांच की मांग की है।
शिष्य राजकुमार का दावा: दुखी होकर आश्रम छोड़ गए महाराज जी
प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ले चुके शिष्य राजकुमार ने आश्रम से जुड़े व्यवस्थापकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि आश्रम के शिष्यों में दो फाड़ हो चुके हैं और अंदर भारी गड़बड़ी चल रही है। राजकुमार के अनुसार:
- प्रेमानंद महाराज अपनी जगह पूरी तरह सही हैं, लेकिन आश्रम में चल रही खींचतान और इस घटना से आहत होकर वे यहां से चले गए हैं।
- महाराज जी के पुराने और निष्ठावान शिष्य उनके साथ हैं, जबकि आश्रम में नए जुड़े कुछ व्यापारी प्रवृत्ति के लोग साधु का भेष धारण कर मनमानी कर रहे हैं।
- आश्रम से एक और शिष्य के लापता होने की बात कही गई है और उसकी सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
- पूरे प्रकरण की निष्पक्षता के लिए उच्चस्तरीय या सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए ताकि दोषी सामने आएं और महाराज जी पर उठ रही उंगलियां शांत हों।
पोस्टमार्टम में सामने आई थी रूह कंपा देने वाली बात
गौरतलब है कि 25 सितंबर को प्रेमानंद महाराज के शिष्य संत रसिक दुलारी शरण ने छत से कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। हालांकि, बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि उनके प्राइवेट पार्ट को ग्राइंडर से काटा गया था। इस खुलासे के बाद से ही आत्महत्या के दावे पर सवाल उठ रहे हैं और इसे सुनियोजित प्रताड़ना व हत्या की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है।
संत समाज ने की मुख्यमंत्री से CBI जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर मथुरा के संतों में भी गहरा आक्रोश है और उन्होंने जांच एजेंसियों से हस्तक्षेप की मांग की है:
- दिनेश फलाहारी (अध्यक्ष, श्रीकृष्ण संघर्ष न्यास): उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आश्रम में नाबालिग बच्चों की स्थिति को लेकर बाल आयोग को भी पत्र लिखा गया है। उनका आरोप है कि मृतक संत बेहद भयभीत थे और उन्हें भारी यातनाएं दी गई थीं।
- राधा नंदगिरि (संत, जूना अखाड़ा): उन्होंने भी घटना को संदिग्ध बताते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति खुद अपना प्राइवेट पार्ट नहीं काट सकता। उन्होंने आशंका जताई कि संत को मारकर नीचे फेंका गया हो सकता है।
स्थानीय संतों और श्रद्धालुओं का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक सच सामने नहीं आ पाएगा। आश्रम में चल रहे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन से तुरंत सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है।


0 टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले टिप्पणी करें।