दिल्ली की सड़कों पर विपक्षी सांसदों और कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया। हिरासत के दौरान पुलिस वैन में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने हाथ में संविधान की प्रति लेकर सरकार और प्रशासन के रवैये पर कड़े सवाल उठाए और जमकर निशाना साधा।
प्रियंका गांधी ने कहा कि देश में लोकतंत्र और संविधान के सिद्धांतों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधियों को चुनाव आयोग तक शांतिपूर्वक जाने से रोका गया और जनता की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया।
चुनाव आयोग से मुलाकात और इस्तीफे की मांग
प्रियंका गांधी ने प्रदर्शन की मुख्य वजह बताते हुए कहा कि विपक्षी दलों के सांसद चुनाव प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग से मिलना चाहते थे।
- लोकसभा और राज्यसभा के सांसद चुनावी प्रक्रिया की कार्यप्रणाली को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष अपनी बात रखना चाहते थे।
- विपक्षी सांसदों का चुनाव आयोग पर से विश्वास उठ चुका है और वे चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगना चाहते थे।
- लगभग 250 जनप्रतिनिधि, जिनमें से प्रत्येक 20 से 30 लाख नागरिकों का प्रतिनिधित्व करता है, शांतिपूर्वक मिलकर अपनी चिंताएं दर्ज कराना चाहते थे।
पुलिस कार्रवाई और सरकार की मानसिकता पर सवाल
सड़क पर लेटने और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सवाल पर प्रियंका गांधी ने कहा कि यह दोष दिल्ली पुलिस के जवानों का नहीं बल्कि आदेश देने वाली सत्ता का है।
उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मी भी असहज थीं और उनमें से कई रो रही थीं, क्योंकि वे भी ऐसा नहीं करना चाहती थीं। प्रियंका गांधी के मुताबिक, असली सवाल यह है कि इस बर्बरता का आदेश कहां से आ रहा है।
'डर और कायरता की राजनीति कर रही है सरकार'
प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार जनता की आवाज से बुरी तरह डरी हुई है। देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों, महिलाओं और विपक्ष के प्रदर्शनों को लाठी-डंडों और पुलिसिया कार्रवाई के जरिए दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मतलब जनता का राज होता है और इसके मूलभूत नियम संविधान में लिखे हैं, जिसके तहत सरकार और पुलिस दोनों को काम करना चाहिए। देश की जनता से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यदि इस सरकार को नहीं हटाया गया, तो देश और गहरे संकट की खाई में चला जाएगा।


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