सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान: 'सच्चा हिंदू प्रधानमंत्री बनता तो बंद होती गोहत्या, मनुस्मृति पर फैलाया जा रहा भ्रम'
आध्यात्म

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान: 'सच्चा हिंदू प्रधानमंत्री बनता तो बंद होती गोहत्या, मनुस्मृति पर फैलाया जा रहा भ्रम'

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक विशेष साक्षात्कार में गोहत्या, मनुस्मृति, ज्ञानवापी और अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर खुलकर विचार रखे। उन्होंने राजनीति, आरएसएस और मौजूदा सरकारों के कामकाज पर तीखे सवाल खड़े किए।

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'द जनपथ न्यूज़' के खास पॉडकास्ट में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने देश के विभिन्न ज्वलंत धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने असली और नकली हिंदू की परिभाषा तय करने से लेकर मनुस्मृति, ज्ञानवापी विवाद, अयोध्या राम मंदिर और उत्तर प्रदेश में गायों की स्थिति पर गंभीर आरोप लगाए।

शंकराचार्य ने कहा कि जो व्यक्ति वेद, शास्त्र और गुरु के वचनों को प्रमाण मानकर जीवन जीता है, वही असली हिंदू है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की आलोचना करते हुए कहा कि जो संस्था वेद, शास्त्र और जीवित गुरु को न मानकर केवल डंडे और झंडे को गुरु मानती है, वह हिंदू परंपरा के अनुकूल नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आजादी के 78 वर्षों में यदि कोई सच्चा हिंदू प्रधानमंत्री बनता, तो देश में गोहत्या पूरी तरह बंद हो चुकी होती।

मनुस्मृति और संविधान पर शंकराचार्य का दृष्टिकोण

मनुस्मृति पर उठने वाले विवादों और महिला विरोधी होने के आरोपों को खारिज करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि मनुस्मृति हिंदुओं का प्रमुख धर्मशास्त्र है, जिसने स्त्री को पुरुष का आधा अंग (अर्धांगिनी) माना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि बिना चुनाव लड़े भी राष्ट्रपति की पत्नी को 'प्रथम महिला' का दर्जा और राष्ट्रपति भवन में सम्मान मिलना मनुस्मृति के इसी सिद्धांत का परिणाम है।

  • दंड का विधान: मनुस्मृति में कड़े दंड का प्रावधान समाज को अनुशासित और भयमुक्त रखने के लिए है। जहां दंड कठोर होता है, वहां अपराध और दुराचार कम होते हैं।
  • स्त्री रक्षा का दायित्व: 'न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति' श्लोक का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि इसका संबंध स्वतंत्रता छीनने से नहीं बल्कि आजीवन सुरक्षा देने से है—बचपन में पिता, युवावस्था में पति और वृद्धावस्था में पुत्र को स्त्री की सुरक्षा का दायित्व दिया गया है।
  • अंबेडकर और मनुस्मृति: शंकराचार्य ने दावा किया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने स्वयं मनुस्मृति नहीं जलाई थी, बल्कि एक मराठी ब्राह्मण ने ऐसा किया था। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने संविधान सभा में संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने की वकालत की थी।

उत्तर प्रदेश में गायों की स्थिति और सरकार पर सवाल

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश में गोवंश की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पशु गणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में 71 लाख से अधिक गायें गायब हुई हैं।

  • प्रशासनिक जवाबदेही: उन्होंने कहा कि राज्य में कुछ भी गलत होता है तो उसकी मुख्य जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होती है। दिखावे के लिए गायों की सेवा की तस्वीरें खिंचवाना और असल में गोवंश का गायब होना अस्वीकार्य है।
  • भैंस के नाम पर गोमांस: उन्होंने आरोप लगाया कि भैंस के मांस के निर्यात की आड़ में गायों का वध किया जा रहा है और इस पूरे मामले पर सरकार को श्वेत पत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

ज्ञानवापी और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा हमला

ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग के संदर्भ में शंकराचार्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्थल के 'समुचित संरक्षण' (Adequate Protection) का आदेश दिया था। हिंदू शास्त्रों के अनुसार किसी मूर्ति या शिवलिंग का संरक्षण केवल उसकी नियमित पूजा-अर्चना और जलाभिषेक से ही संभव है, उसे ताले में बंद करके नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश प्रशासन ने उन्हें पूजा करने से रोककर अदालत के आदेश की अवहेलना की और उन्हें नजरबंद किया।

वहीं अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर उन्होंने कहा कि निर्माण समिति और पदाधिकारियों पर लगे वित्तीय आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी, लेकिन लीपापोती कर क्लीन चिट दे दी गई। उन्होंने वास्तविक हिंदुओं से आह्वान किया कि वे धार्मिक स्थलों की मर्यादा बचाने के लिए सजग हों।

गौ रक्षा के मुद्दे पर राजनीतिक रुख

शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि वे किसी दल विशेष के विरोधी या समर्थक नहीं हैं, बल्कि जो भी गोमाता की रक्षा के लिए नीतिगत और कानूनी कदम उठाएगा, वे उसके साथ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि गोमाता के संरक्षण को लेकर वे उत्तर प्रदेश के प्रमुख दलों के पास प्रतिनिधिमंडल भेज रहे हैं और यदि मौजूदा दल आगे नहीं आते हैं, तो जनता ऐसे नए विकल्प का समर्थन करेगी जो गोहत्या के पूर्ण खात्मे का संकल्प ले।

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