ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने 'द जनपथ न्यूज़' की पत्रकार शाज़िया निसार के साथ विशेष बातचीत में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर कई बेबाक बयान दिए। उन्होंने गो-संरक्षण, मनुस्मृति, ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग की पूजा, और अयोध्या के मुद्दों को लेकर केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि सच्चा हिंदू वह है जो वेद-शास्त्रों और गुरुओं के आदेशों का पालन करता है। उन्होंने किसी भी ऐसे व्यक्ति या विचारधारा को 'नकली हिंदू' करार दिया जो शास्त्रों और मर्यादाओं को दरकिनार कर अपनी सुविधा अनुसार धर्म की व्याख्या करते हैं।
उत्तर प्रदेश में गो-हत्या और गायब गायों का मुद्दा
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश में गोवंश की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सरकारी आंकड़ों और पशु गणना का हवाला देते हुए सवाल उठाए:
- पशु गणना और शासकीय पत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 71 लाख गाएं गायब पाई गई हैं।
- साढ़े नौ वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद गोवंश का इतनी बड़ी संख्या में लापता होना गंभीर लापरवाही या मिलीभगत का संकेत है।
- गो-मांस निर्यात और बूचड़खानों को लाइसेंस देने की व्यवस्था पर रोक लगाने के बजाय दिखावे की गो-सेवा की जा रही है।
- जो लोग अपने राज्य में गोवंश की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं, वे गो-रक्षक होने का दावा कैसे कर सकते हैं।
ज्ञानवापी में पूजा पर रोक को बताया हिंदू समाज के साथ अन्याय
ज्ञानवापी परिसर के मामले पर बोलते हुए शंकराचार्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वजूखाने में मिले शिवलिंग के 'उचित संरक्षण' (Adequate Protection) का आदेश दिया था। सनातन धर्म के अनुसार किसी भी विग्रह या मूर्ति का वास्तविक संरक्षण केवल विधि-विधान से की जाने वाली पूजा और जलाभिषेक से ही संभव है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश प्रशासन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उन्हें ज्ञानवापी में पूजा करने से रोका गया और अनशन के दौरान हाउस अरेस्ट रखा गया। उन्होंने इसे कोर्ट के आदेश की अवहेलना और हिंदू समाज के अधिकारों पर कुठाराघात करार दिया।
मनुस्मृति और महिलाओं के अधिकारों पर दृष्टिकोण
मनुस्मृति की आलोचनाओं और राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों पर जवाब देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि मनुस्मृति को समझे बिना ही उसे विवादित बनाया जाता है। उन्होंने रेखांकित किया कि मनुस्मृति में महिलाओं को पुरुष का आधा अंग (अर्धांगिनी) मानकर बराबरी और संरक्षण का अधिकार दिया गया है।
- मनुस्मृति महिला की हर उम्र—बचपन, युवावस्था और वृद्धावस्था—में पिता, पति और पुत्र को उनकी सुरक्षा की जवाबदेही सौंपती है।
- डॉ. बी.आर. आंबेडकर द्वारा मनुस्मृति जलाने की बात को उन्होंने ऐतिहासिक रूप से गलत बताया और कहा कि इसे एक मराठी ब्राह्मण ने जलाया था, न कि आंबेडकर ने।
- आंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वाले उनके उस बयान पर चुप रहते हैं जिसमें उन्होंने संविधान को जला देने तक की बात कही थी।
गो-रक्षा के मुद्दे पर मुसलमानों का समर्थन
इस साक्षात्कार में शंकराचार्य ने उस बयान की भी व्याख्या की जिसमें उन्होंने गो-हत्या के विरोध में खड़े मुसलमानों की सराहना की थी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा और अन्य क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आगे आकर सार्वजनिक रूप से गो-हत्या न करने और गो-मांस न खाने का संकल्प लिया। शंकराचार्य के अनुसार, जो व्यक्ति या समुदाय खुलकर गो-रक्षा के पक्ष में खड़ा है, वह उन तथाकथित हिंदुओं से बेहतर है जो हिंदू होने का दावा तो करते हैं लेकिन गो-हत्या पर मौन साधे रहते हैं या उसमें भागीदार बनते हैं।
पीएम मोदी के प्रयासों और मंदिर निर्माण पर प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युवाओं (Gen-Z) से जुड़ने के प्रयासों की शंकराचार्य ने सराहना की और कहा कि एक राष्ट्रप्रमुख को हर आयु वर्ग के नागरिकों से जुड़ना चाहिए। हालांकि, पीएम मोदी का मंदिर बनाए जाने के प्रस्ताव पर उन्होंने सख्त विरोध दर्ज कराया।
उन्होंने कहा कि जीवित व्यक्ति या प्रधानमंत्री का मंदिर बनाना सनातन परंपरा के विपरीत और अस्वीकार्य है। मंदिर केवल ईश्वर का हो सकता है, किसी राजनीतिक व्यक्ति का नहीं। उन्होंने जनता के पैसों या सरकारी तंत्र के जरिए ऐसे प्रयासों को हिंदू धर्म को बदनाम करने की साजिश बताया।


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