ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक साक्षात्कार के दौरान उत्तर प्रदेश में गोवंश की स्थिति, संविधान बनाम मनुस्मृति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और बागेश्वर बाबा से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर गायों के गायब होने और गोमांस निर्यात को लेकर राज्य सरकार की जवाबदेही पर कड़े सवाल उठाए।
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि जो काम सही है उसकी प्रशंसा होनी चाहिए, लेकिन जहां गोवंश और धर्म की उपेक्षा होगी, वहां वे खुलकर सवाल खड़े करते रहेंगे।
गोहत्या और गोमांस निर्यात पर उठाए गंभीर सवाल
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि देश और प्रदेश में भैंस के मांस के नाम पर गायों का मांस निर्यात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लाइसेंस देती है और उत्तर प्रदेश की सरकार इसके लिए व्यवस्था मुहैया कराती है।
- उन्होंने दावा किया कि पशु संघ के अध्यक्ष ने ऑन-रिकॉर्ड स्वीकार किया है कि पहले छिपकर कटाई होती थी, जबकि अब व्यवस्थित तरीके से यह काम हो रहा है।
- सरकारी आंकड़ों और पत्रों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 71 लाख गायें गायब पाई गई हैं, जिन दस्तावेजों पर उत्तर प्रदेश के बड़े अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।
- शंकराचार्य ने कहा कि राज्य में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ही उत्तरदायी होते हैं। पिछले साढ़े सात सालों में करोड़ों गायें गायब हो चुकी हैं और जो अपने राज्य में गायों को गायब होने दे, उसका चेहरा तक नहीं देखना चाहिए।
संविधान और मनुस्मृति पर शंकराचार्य का दृष्टिकोण
संविधान और मनुस्मृति को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि वे संविधान को उसी सीमा तक स्वीकार करते हैं, जहां तक वह मनुस्मृति का विरोध न करे। यदि संविधान में मनुस्मृति का विरोध होगा, तो वे उसका विरोध करेंगे।
मनुस्मृति के महिला विरोधी होने के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि इस ग्रंथ में स्त्री को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने कभी मनुस्मृति नहीं जलाई थी और उनके नाम पर समाज में झूठ फैलाया जा रहा है।
पीएम मोदी के प्रयासों की सराहना, बागेश्वर बाबा पर प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं (जेन-ज़ी) से जुड़ने और संवाद स्थापित करने के प्रयासों पर शंकराचार्य ने सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा:
- प्रधानमंत्री को देश के हर आयु वर्ग के लोगों से जुड़ने की कोशिश करनी चाहिए, यह एक सराहनीय कदम है।
- जो भी अच्छा काम होगा, उसकी प्रशंसा अवश्य की जाएगी।
वहीं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर बाबा) को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने साफ कहा कि शंकराचार्य पद से उनकी कोई बराबरी नहीं है और न ही उनका उनसे कोई लेना-देना है।


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