ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 'द जनपथ न्यूज़' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में देश के राजनीतिक नेतृत्व और सनातन धर्म से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश में जब सनातन के नाम पर सरकारें हैं, तब भी गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा नहीं मिल पा रहा है और इसके लिए उन्हें धर्मयुद्ध छेड़ना पड़ रहा है।
साक्षात्कार के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं की हिंदू पहचान पर सवाल उठाए और गाय को पशु कहे जाने के मुद्दे पर सरकार की नीतियों की आलोचना की।
असली और नकली हिंदू की परिभाषा
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि उनके अनुसार असली हिंदू वह है जो:
- वेद-शास्त्रों को मानता हो।
- गुरु का सम्मान करता हो।
- गाय को माता मानता हो।
उन्होंने दावा किया कि पिछले 78 वर्षों में भारत में कोई भी ऐसा प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति नहीं हुआ जिसे 'असली हिंदू' कहा जा सके, क्योंकि यदि ऐसा होता तो गाय को पशु कहे जाने पर आधिकारिक तौर पर रोक लग चुकी होती।
उत्तर प्रदेश में गायों की स्थिति
शंकराचार्य ने सरकारी पशुगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में गायों की संख्या सबसे तेजी से घट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भले ही कागजों में गौ-कल्याण की योजनाएं चलाती हो, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है।
मुस्लिम समाज के रुख की सराहना
साक्षात्कार में एक दिलचस्प बात सामने आई कि शंकराचार्य ने देश के मुस्लिम समाज के एक वर्ग द्वारा बकरीद पर गौहत्या न करने के निर्णय की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि:
- देश के सभी मुसलमानों ने पिछली बकरीद पर गौहत्या न करने का निर्णय लिया था।
- इस बड़े फैसले का उन्होंने और समाज ने अभिनंदन किया था।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा और आरएसएस के नेता अक्सर मंचों से गाय को राष्ट्रपशु घोषित करने की मांग करते हैं, लेकिन जब गौमाता को 'माता' कहने की बात आती है तो उनकी नीतियां बदल जाती हैं।


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