सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
The Janpath News
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाए यूपी में गोवंश के लापता होने और राम मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर सवाल
धर्म & ज्योतिष

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाए यूपी में गोवंश के लापता होने और राम मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर सवाल

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश में लाखों गायों के लापता होने, अयोध्या मंदिर प्रबंधन और सनातन धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर केंद्र व राज्य सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

शेयर f X

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक साक्षात्कार में उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार और अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने राज्य में गोवंश की स्थिति से लेकर राम जन्मभूमि परिसर के प्रबंधन तक कई गंभीर आरोप लगाए और शासन-प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की।

यूपी में गोवंश के आंकड़ों पर उठाए सवाल

शंकराचार्य ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में पशु गणना के आंकड़ों के अनुसार 2019 से 2024 के बीच बड़ी संख्या में गोवंश लापता हुआ है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री को इसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

  • उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 71 लाख गायों का कोई स्पष्ट ब्योरा सरकारी रिकॉर्ड और व्यवस्था में सामने नहीं आ रहा है।
  • भैंस के मांस के निर्यात की आड़ में गोमांस भेजे जाने की आशंकाओं पर उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
  • उन्होंने कहा कि जब तक इस तरह के गंभीर सवालों का आधिकारिक जवाब नहीं मिलता, तब तक नेतृत्व से संवाद का कोई औचित्य नहीं है।

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट और 'क्लीन चिट' पर आपत्ति

अयोध्या मंदिर निर्माण और प्रबंधन समिति को लेकर शंकराचार्य ने तीखी असहमति जताई। उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े लोगों को दी गई क्लीन चिट को नकारते हुए कहा कि कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों की पारदर्शी जांच नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि मंदिर के पवित्र स्थान की मर्यादा का पालन होना आवश्यक है। धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में ऐसे लोगों की नियुक्ति पर उन्होंने सवाल उठाए जो धार्मिक नियमों और आचार संहिता का पूरी तरह पालन नहीं करते। इसके साथ ही उन्होंने राम जन्मभूमि को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त करने के लिए दोबारा जन-आंदोलन की आवश्यकता पर बल दिया।

पीएम मोदी के प्रयासों और सनातन की स्थिति पर विचार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं (Gen-Z) से संवाद साधने के प्रयासों पर शंकराचार्य ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का हर वर्ग से जुड़ना एक अच्छी पहल है और जो अच्छा कार्य है, उसकी सराहना की जानी चाहिए।

हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले दस वर्षों में सनातन धर्म और हिंदुओं की आकांक्षाएं पूरी नहीं हो सकी हैं। उनके अनुसार, धर्म के प्रतीकों और आस्था का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए अधिक किया गया, जबकि ठोस स्तर पर धार्मिक और सांस्कृतिक संरक्षण के मामलों में निराशा ही हाथ लगी है।

नेताओं के मंदिर निर्माण की प्रवृत्ति का विरोध

हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी का मंदिर बनाए जाने की चर्चाओं पर शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मंदिर केवल ईश्वर का हो सकता है, किसी जीवित राजनेता का नहीं। उन्होंने कहा कि शास्त्रों और हिंदू परंपराओं के विपरीत किसी व्यक्ति विशेष की पूजा की परिपाटी शुरू करना धर्म की मर्यादा के खिलाफ है और इसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।

« होमपेज पर वापस जाएं

0 टिप्पणियाँ

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले टिप्पणी करें।

टिप्पणी लिखें