दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान बैरिकेडिंग, हिरासत, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियों और इंटरनेट सेवाओं में रुकावट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के निर्देशों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इसी बीच, हिरासत में लिए गए सीजेपी के तीन प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत से सशर्त रिहाई मिल गई है।
सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली पुलिस को अहम निर्देश
11 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को हिरासत, बैरिकेडिंग और इंटरनेट सेवाओं के संचालन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- किसी भी व्यक्ति को कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में नहीं लिया जा सकता।
- शांतिपूर्ण और निहत्थे तरीके से एकत्र होने वाले लोगों के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए।
- मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित रहनी चाहिए, जब तक कि सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की गंभीर आशंका न हो।
- इंटरनेट सेवाएं कानून के दायरे में निर्बाध रहनी चाहिए और आम नागरिकों के आवागमन को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
- अदालत ने यह भी दर्ज किया कि वकीलों और पत्रकारों को उनके पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन से नहीं रोका जाना चाहिए।
केंद्र सरकार को अवमानना याचिका पर नोटिस
10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान वकीलों और पत्रकारों को रोके जाने की खबरों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक याचिका पर नोटिस जारी किया है। इस याचिका में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कथित अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होना अवमानना साबित होना नहीं है और इस मामले पर आगे विचार किया जाएगा।
दीपके, दास और रांका की सशर्त रिहाई
सीजेपी के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को शनिवार को दिल्ली पहुंचने के बाद पुलिस ने हिरासत में लिया था। रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने तीनों को रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, यह रिहाई बिना शर्त नहीं थी:
- तीनों नेताओं को एक वर्ष तक शांति और अच्छे व्यवहार की शर्त पर रिहा किया गया है।
- इसके लिए उन्हें 50,000 रुपये का जमानती मुचलका भरना पड़ा है।
विवाद की मुख्य वजह: मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन
इस पूरे विवाद की जड़ में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी का विरोध प्रदर्शन है। संगठन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठा रहा है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है। हालांकि निर्वाचन आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात और हेरफेर के आरोपों को खारिज कर दिया है।
फिलहाल दिल्ली में मेट्रो सेवाएं और मोबाइल इंटरनेट बहाल कर दिए गए हैं, लेकिन सुरक्षा बलों की तैनाती और कानूनी प्रक्रिया जारी है।


0 टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले टिप्पणी करें।