जेसीपी (JCP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान 'मोदी की तेरहवीं का खाना' कहकर लोगों को समोसे खिलाने वाली निशु आज़ाद का मामला इन दिनों चर्चा में है। निशु आज़ाद द्वारा एक पॉडकास्ट में अपनी और अपने पिता की मारपीट तथा हत्या की कोशिश (धारा 307) जैसी गंभीर बातों का जिक्र करने के बाद यह विवाद और गहरा गया है। इस मामले में पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया है, जिसके बाद से कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।
निशु आज़ाद का वायरल वीडियो और तीखी आलोचना
वीडियो में निशु आज़ाद जेसीपी के विरोध में व्यंग्य करते हुए लोगों को 'मोदी की तेरहवीं का खाना' यानी समोसे परोसती नजर आती हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा, क्योंकि लोगों को यह तरीका आपत्तिजनक लगा।
पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज के दावे
एक पॉडकास्ट के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी कहानी साझा करते हुए कई गंभीर दावे किए। उनके दावों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- उन्होंने दावा किया कि उन्होंने निशु आज़ाद के पिता का सिर फोड़ा था।
- उन्होंने कहा कि उन पर धारा 307 (हत्या की कोशिश) लगी थी, जिसमें सिर पर सात टांके आए थे।
- उन्होंने यह भी दावा किया कि घटना के बाद वे जेल नहीं गए, बल्कि रातभर घूम रहे थे।
- उन्होंने बातचीत में कपिल मिश्रा, चिराग पासवान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए उन्हें अपना बड़ा भाई और समर्थक बताया।
दिल्ली जंतर-मंतर पर मारपीट और एफआईआर
23 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेसीपी के प्रदर्शन के दौरान विवाद बढ़ा और मारपीट हुई, जिसमें निशु आज़ाद के पिता संजय कुमार के सिर पर चोट आई। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, हालांकि दिल्ली पुलिस के मुताबिक संजय कुमार की मेडिकल रिपोर्ट में चोट साधारण प्रकृति की (स्कल फ्रैक्चर की पुष्टि नहीं) पाई गई।
पुलिस कार्रवाई और विरोधाभास
पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज और दूसरे आरोपी को मौके पर पकड़कर पूछताछ, कानूनी प्रक्रिया पूरी करने और नोटिस देकर छोड़ दिया था। पुलिस का पक्ष था कि मेडिकल रिपोर्ट में चोट गंभीर नहीं थी और कार्रवाई कानून के तहत की गई, जबकि स्वतंत्र भारद्वाज के पॉडकास्ट में किए गए दावों ने इस मामले को और उलझा दिया।
पोडकास्ट बनाम पुलिस रिपोर्ट: क्या हैं नए सवाल
अब इस मामले में कई विरोधाभास सामने आ रहे हैं, जिन्हें लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं:
- पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा हत्या की कोशिश (धारा 307) और जेल न जाने के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
- पुलिस की मेडिकल रिपोर्ट और शुरुआती कार्रवाई के अनुसार चोट साधारण थी, जिससे धारा 307 लगाने का आधार कमजोर पड़ता है।
- स्वतंत्र भारद्वाज का यह पॉडकास्ट घटना के दो महीने बाद सामने आया है, जिससे इसके समय और उद्देश्यों पर भी चर्चा हो रही है।


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