उत्तर प्रदेश में विकास के दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच की बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है। हाल ही में बीजेपी सांसद रवि किशन ने गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने वहां के विकास को 'स्पेन' जैसी अद्भुत और स्मार्ट सिटी बताया था।
लेकिन क्या यूपी की राजधानी लखनऊ और अन्य बड़े एक्सप्रेसवे की हकीकत इन दावों से मेल खाती है? आइए इस पूरे मामले का विश्लेषण करते हैं।
लखनऊ में सड़क धंसने से बड़ा हादसा
रवि किशन के 'स्पेन' वाले बयान के ठीक विपरीत, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हालात चिंताजनक हैं। 2 सितंबर को लखनऊ यूनिवर्सिटी रोड पर सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे बड़ा और गहरा गड्ढा बन गया।
- सड़क धंसने के इस हादसे में दो लोग अपनी बाइक समेत गड्ढे में जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए।
- यह हादसा किसी आम सड़क पर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के मौजूदा राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा के घर के ठीक सामने की सड़क पर हुआ।
- शुरुआती आकलन में नगर निगम ने भूमिगत पाइपलाइन के लीकेज या नाले से पानी के रिसाव को इसका कारण माना, जिससे सड़क के नीचे की मिट्टी कट गई।
एक्सपर्ट्स के दावों पर सवाल और अन्य एक्सप्रेसवे की घटनाएं
यह समस्या सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के बड़े और महंगे एक्सप्रेसवे पर भी बारिश के बाद इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं, जो बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं:
- 1 सितंबर 2026 को उन्नाव गंगा एक्सप्रेसवे पर भारी बारिश के बाद बसरतगंज टोल प्लाजा के पास सड़क का हिस्सा धंस गया और करीब 7 फीट गहरा गड्ढा बन गया।
- अक्टूबर 2022 में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के एक हफ्ते के भीतर ही जालौन में भारी बारिश के बाद एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा धंस गया था, जिसमें कार सवार चार लोग घायल हो गए थे।
- नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर भी अक्टूबर 2022 में सुल्तानपुर के हलियापुर में बारिश के बाद सड़क धंसने से एक कार गड्ढे में जा गिरी थी और चार लोग घायल हुए थे।
विकास की असली परीक्षा: गुणवत्ता और जवाबदेही
विकास के पैमाने सिर्फ नए एक्सप्रेसवे या सड़कों की लंबाई गिनने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
- हजारों करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इन परियोजनाओं में बारिश के बाद इस तरह के गड्ढे होना डिज़ाइन, ड्रेनेज या निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
- सड़क टूटने के बाद उसकी मरम्मत करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन नई सड़क या एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ समय बाद ही क्यों धंस जाते हैं, इसकी जवाबदेही तय होना भी उतना ही ज़रूरी है।
- जनता को केवल विकास की चमक ही नहीं, बल्कि ज़मीन पर सुरक्षित और टिकाऊ बुनियादी ढांचा देखने का भी पूरा अधिकार है।


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