सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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योगी आदित्यनाथ मुसलमानों के ख़िलाफ़ नहीं: जाने-माने शायर नदीम फ़र्रुख़ का बड़ा बयान
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योगी आदित्यनाथ मुसलमानों के ख़िलाफ़ नहीं: जाने-माने शायर नदीम फ़र्रुख़ का बड़ा बयान

द जनपथ न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में मशहूर शायर नदीम फ़र्रुख़ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राजनीति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की।

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हाल ही में द जनपथ न्यूज़ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में मशहूर शायर नदीम फ़र्रुख़ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर फैल रही धारणाओं पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है कि देश या उत्तर प्रदेश का मुसलमान बीजेपी को वोट नहीं देता, और योगी आदित्यनाथ को मुसलमानों के ख़िलाफ़ बताना एक राजनीतिक प्रोपेगैंडा है।

योगी आदित्यनाथ और मुसलमानों पर भ्रम

शायर नदीम फ़र्रुख़ ने स्पष्ट किया कि बीजेपी के भीतर भी और उनके कार्यक्रमों में भी कई मुसलमान शामिल हैं।

  • गोरखनाथ मंदिर के भीतर और उनके कई भरोसेमंद करीबी मुसलमान हैं जो मठ का सारा लेखा-जोखा और हिसाब-किताब संभालते हैं।
  • गोरखनाथ मंदिर और गोरक्षनाथ इलाके के आसपास रहने वाले कई लोग और अंसारी बिरादरी के लोग उनके संपर्क में हैं।
  • योगी आदित्यनाथ पर मुसलमानों के ख़िलाफ़ होने का आरोप सिर्फ राजनीतिक प्रोपेगैंडा है, जबकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है।

राजनीतिक दलों की कार्यशैली और रणनीति

नदीम फ़र्रुख़ ने राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली और बुलडोजर नीति पर भी अपने विचार साझा किए।

  • राजनीति में नंबर 1 को सॉफ्ट और नंबर 2 को हार्डलाइनर बनाकर पेश करने का फॉर्मूला पुराना है।
  • अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी से लेकर नरेंद्र मोदी और अमित शाह तक के उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि कैसे राजनीतिक समीकरण बदलते हैं।
  • बुलडोजर नीति के बजाय अवैध संपत्तियों को सरकार द्वारा अधिग्रहित करके वहां सरकारी या शैक्षणिक संस्थान खोलने जैसे वैकल्पिक तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश का अगला चुनाव और राजनीतिक समीकरण

उत्तर प्रदेश के आगामी राजनीतिक भविष्य और चुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि आने वाला समय काफी दिलचस्प होगा।

  • यूपी में मुख्यमंत्री बनने के लिए 203 सीटें चाहिए, और यहां के चुनाव हमेशा रोचक और मजेदार होते हैं।
  • चुनाव से पहले यूपी को चार हिस्सों में तोड़ने जैसी बातें सिर्फ चर्चाएं हैं, ज़मीनी स्तर पर ऐसा कुछ नहीं होने वाला।
  • बिना लड़े कुछ नहीं मिलेगा, और हर राजनीतिक दल को अपनी बेहतर रणनीति के साथ मैदान में उतरना होगा।
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