देश की राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करने निकले युवाओं और छात्रों को पुलिस ने जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही रोक दिया। बाबा खड़क सिंह मार्ग और प्राचीन हनुमान मंदिर के समीप सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए दिल्ली पुलिस और आरएएफ (RAF) के जवानों ने बैरिकेडिंग व मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शनकारियों का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया।
इस दौरान मौके पर भारी गहमागहमी और धक्का-मुक्की देखने को मिली। पुलिस ने इलाके में धारा 163 लागू होने की घोषणा करते हुए प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने का प्रयास किया और कई छात्र-छात्राओं को बसों में भरकर हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें और आरोप
सड़कों पर उतरे छात्रों और युवाओं का कहना था कि देश में निष्पक्ष चुनाव और नागरिकता के अधिकारों पर हमला हो रहा है। हाथों में पोस्टर और भगत सिंह की तस्वीरें लिए प्रदर्शनकारी लगातार अपनी आवाज उठा रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों को सामने रखा:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल प्रभाव से इस्तीफा मांगा गया।
- वोट चोरी और मतदाता सूची (एसआईआर) से करोड़ों लोगों के नाम काटे जाने के गंभीर आरोप लगाए गए।
- वर्ष 2023 में चुनाव आयुक्तों को लेकर बनाए गए कानून और उनके विशेषाधिकारों का कड़ा विरोध किया गया।
- संविधान के कथित उल्लंघन और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन पर रोक लगाने की मांग की गई।
पुलिस बल का कड़ा पहरा और टकराव की स्थिति
प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने 'शौर्य वाहन' और बैरिकेड्स सड़क पर खड़े कर दिए थे। जब छात्र आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे, तो पुलिस ने बल प्रयोग शुरू किया। प्रदर्शनकारियों को घसीटकर और धक्का देकर जबरन दिल्ली पुलिस की बसों में भरा जाने लगा।
महिला पुलिसकर्मियों द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों को भी बसों में डाला गया। इस दौरान कुछ छात्र भावुक होकर रोते नजर आए, तो कुछ ने बसों की खिड़कियों से हाथ बाहर निकालकर 'तानाशाही नहीं चलेगी' और लोकतंत्र बचाने के नारे लगाए। कई युवाओं ने सवाल किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है, फिर उन्हें जंतर-मंतर जैसी तय जगह पर जाने से क्यों रोका गया।
नेताओं को एयरपोर्ट पर रोकने और बाहरी तत्वों के उकसावे का आरोप
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने दावा किया कि उनके कुछ प्रमुख साथियों को हवाई अड्डे पर ही रोक लिया गया था ताकि वे इस प्रदर्शन का नेतृत्व न कर सकें। इसके चलते आम छात्रों और युवाओं ने खुद आगे बढ़कर मोर्चा संभाला।
वहीं, प्रदर्शन स्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ बाहरी तत्व वहां आकर पुलिस के साथ मिलकर छात्रों को उकसा रहे थे और माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस द्वारा मीडियाकर्मियों को भी छात्रों से सीधी बातचीत करने से रोका गया, जिसको लेकर मौके पर मौजूद पत्रकारों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस भी हुई।


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