आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ा खुलासा करने का दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के भीतर गंभीर आंतरिक मतभेद हैं और चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर लगातार सवाल उठाए हैं, जिसे सरकार ने पूरी तरह नजरअंदाज किया।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने मनमाने ढंग से एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के जरिए देश भर में करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए और जोड़े हैं, जिससे चुनावों की निष्पक्षता पूरी तरह समाप्त हो गई है।
चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार जताई आपत्ति
संजय सिंह के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ कार्यरत दो अन्य चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने उनके फैसलों पर गंभीर असहमति जताई थी। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों की आपत्तियों को अनसुना कर एकतरफा निर्णय लिए गए।
- दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने के भीतर 14 बार ज्ञानेश कुमार के निर्णयों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई।
- इस मामले को लेकर कैबिनेट सेक्रेटरी तक को चिट्ठी लिखी गई, जिसका सीधा मतलब है कि प्रधानमंत्री और पूरी कैबिनेट को इसकी जानकारी थी।
- चुनाव आयुक्त संधू ने साफ तौर पर कहा कि फॉर्म-6 में किए गए बदलावों की जानकारी उन्हें आधिकारिक तौर पर नहीं, बल्कि मीडिया के जरिए मिली।
एसआईआर के नाम पर करोड़ों वोटों में हेरफेर का दावा
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए देश भर में करीब 13 करोड़ लोगों के वोट काट दिए गए। उन्होंने विभिन्न राज्यों के आंकड़े पेश करते हुए इसे 'चुनावी लूट' और 'डकैती' करार दिया।
- बिहार: विधानसभा क्षेत्रों में 50-50 हजार वोट काटे गए और भाजपा महज 2 से 5 हजार वोटों के अंतर से सीटें जीत गई।
- पश्चिम बंगाल: करीब 27 लाख वोट काटे गए, जबकि 1 लाख 26 हजार मामलों की सुनवाई में 93 प्रतिशत वोट वैध पाए गए।
- महाराष्ट्र: लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान 77 लाख वोट बढ़ा दिए गए, जिसके बाद परिणाम एकतरफा रहे।
- दिल्ली: अरविंद केजरीवाल के क्षेत्र में 40 हजार वोट काटे गए, जबकि सौरभ भारद्वाज और तुगलकाबाद सहित कई अन्य क्षेत्रों में भी भारी कटौती की गई।
चुनाव रद्द करने और एसआईआर प्रक्रिया बंद करने की मांग
संजय सिंह ने कहा कि संविधान और कानून ने एसडीएम तथा ईआरओ (ERO) को वोट जोड़ने, काटने और दस्तावेजों की जांच का अधिकार दिया था, लेकिन अब पूरी व्यवस्था को केंद्रीकृत कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सूची के हिसाब से ही नाम जोड़े और काटे जा रहे हैं।
उन्होंने जनता से लोकतंत्र और वोट के अधिकार की रक्षा के लिए आवाज उठाने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि एसआईआर की प्रक्रिया को तुरंत बंद किया जाए, ज्ञानेश कुमार की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई हो और बिहार, बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र सहित सभी प्रभावित राज्यों के चुनाव रद्द किए जाएं।


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