उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगे पोस्टरों ने सूबे की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें समाजवादी पार्टी और भाजपा आमने-सामने नजर आ रही हैं।
इन पोस्टरों के जरिए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर मुस्लिम तुष्टिकरण और राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों के खिलाफ रुख को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
अयोध्या से मथुरा तक लगे विवादित पोस्टर
उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख जिलों में अचानक से कुछ ऐसे पोस्टर सामने आए जिन्होंने राजनीतिक भूचाल ला दिया।
- अयोध्या, मथुरा और बाराबंकी में बड़े पैमाने पर होर्डिंग और पोस्टर लगाए गए हैं।
- इन पोस्टरों पर 'दिल में बाबर, मुंह में राम' जैसे नारे लिखे गए हैं।
- पोस्टरों में अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ उन्हें टोपी पहने हुए दिखाया गया है, जिससे धार्मिक और राजनीतिक भावनाएं भड़कने की आशंका जताई जा रही है।
- सपा कार्यकर्ताओं ने इन पोस्टरों को तुरंत फाड़ दिया और इसे भाजपा की सोची-समझी साजिश करार दिया।
राजभर और मंत्रियों का तीखा हमला
सत्ता पक्ष के नेताओं ने इन पोस्टरों और बयानों को आधार बनाकर समाजवादी पार्टी पर जोरदार हमला बोला है।
- सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि अखिलेश यादव प्रदेश में दंगा चाहते हैं।
- राजभर ने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में होने वाले दंगों और कर्फ्यू से आम जनता की हानि होती थी, और आज भी वे वैसी ही स्थितियां चाहते हैं।
- मंत्री नरेंद्र कश्यप ने इमरान मसूद और अन्य नेताओं के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि सपा और कांग्रेस गठबंधन की असलियत जनता के सामने आ चुकी है।
सपा का पलटवार और चुनावी समीकरण
समाजवादी पार्टी ने इन पोस्टरों को बीजेपी की हिंदू-मु मुस्लिम राजनीति का हिस्सा बताया है।
- सपा नेताओं का कहना है कि बीजेपी राम मंदिर और अन्य मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है।
- पार्टी का मानना है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस तरह की हरकतें राजनीतिक लाभ लेने की एक सुनियोजित कोशिश हैं।
- इन पोस्टरों के आने के बाद से राज्य में राजनीतिक बयानबाजी और आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर लगातार जारी है।


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