नेपाल में हाल ही में आए भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी का सिलसिला जारी है। भारत सरकार ने नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है, जिससे प्रभावितों और उनके परिवारों ने राहत की सांस ली है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकाले गए नागरिकों ने बताया कि संकट के इस दौर में उन्होंने मौत को बहुत करीब से देखा, लेकिन भारत सरकार के त्वरित प्रयासों से उनकी सुरक्षित घर वापसी संभव हो सकी है।
नेपाल में फंसे नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी
विदेश मंत्रालय के प्रयासों के बाद नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है:
- तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री सुरक्षित दिल्ली पहुंच चुके हैं।
- त्रिशूल हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे 63 भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।
- चीन की सीमा पर फंसे 96 अन्य भारतीय नागरिक भी सुरक्षित नेपाल की सीमा में पहुंच चुके हैं, जिनकी वतन वापसी के प्रयास जारी हैं।
बाल-बाल बचे तीर्थयात्री, सुनाई खौफनाक दास्तान
नेपाल यात्रा के दौरान बाढ़ का सामना करने वाले एक तीर्थयात्री ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया:
- वे बस से काठमांडू से 75 किलोमीटर की दूरी पर थे, तभी बाढ़ का पानी सड़क पर आ गया।
- गाड़ी पानी के बीच से गुजर रही थी और मौत सिर्फ 50 से 100 मीटर की दूरी पर थी।
- चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत बस को वापस मोड़ा और सभी यात्रियों की जान बचाई।
- महज 20 मिनट के भीतर पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि पूरा रास्ता और पुल बह गया, जिसे यात्रियों ने अपनी आंखों से देखा।
भारत की पड़ोसी देश को मदद
भारत सरकार केवल अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस प्राकृतिक आपदा से उबरने में पड़ोसी देश नेपाल की भी पूरी मदद कर रही है:
- राहत सामग्री से भरे दो एयरक्राफ्ट नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि तीसरा विमान भी रवाना हो चुका है।
- नेपाल के अनुरोध पर टनल रेस्क्यू टीम भेजने की भी तैयारी की जा रही है।
- संकट की इस घड़ी में भारत 'वसुधैव कुटुंबकम' के अपने संस्कार को निभाते हुए नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है।


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