हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपने मतभेदों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कुंभ के बाद उत्पन्न हुई स्थितियों और गौ रक्षा के मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए कई अहम खुलासे किए।
योगी आदित्यनाथ के साथ मतभेद के मुद्दे
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि कुंभ के बाद ऐसा लगा मानो कोई जंग छिड़ गई हो। उन्होंने बताया कि हमारे हृदय की पीड़ा व्यक्त करने पर पुलिस लगाकर ब्रह्मचारियों को पिटवाया गया और उनका अपमान किया गया। इसके बावजूद उन्होंने व्यक्तिगत कुछ न कहकर इसे सनातन धर्म और उसके प्रतीकों का अपमान बताया, जिस पर कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई।
गौ रक्षा और सरकारों की विफलता
गौ रक्षा के मुद्दे पर शंकराचार्य ने केंद्र और राज्य सरकारों को आड़े हाथों लिया और कहा कि गोमाता के नाम पर केवल राजनीति हो रही है। उन्होंने कहा कि:
- हिंदू होकर भी हमारी ही मां (गाय) को पशु कहा जा रहा है और उसे काटा जा रहा है।
- 78 साल से इस नेता और पार्टी पर भरोसा करते हुए हम चले आए, लेकिन अब धैर्य टूट रहा है।
- देश की 22 राज्यों की सरकारों और केंद्र सरकार को सबसे पहले गाय को पशु सूची से हटाकर राष्ट्रमाता का दर्जा देना चाहिए।
सनातन राजनीति और भविष्य की रणनीति
शंकराचार्य ने कहा कि देश में सनातनी राजनीति होनी चाहिए और सनातनी विचारधारा के लोग सत्ता में आने चाहिए ताकि बिना मांगे गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर सरकारें हमारी मांग नहीं मानती हैं, तो हमें गौमाता की रक्षा के लिए सनातनियों के साथ मिलकर कड़ा रुख अपनाना होगा।


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