हाल ही में 'The Janpath News' के पॉडकास्ट में जाने-माने शायर और वक्ता नदीम फारुख ने देश की मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर खुलकर बात की। उन्होंने शायर की भूमिका से लेकर देश के हालात और राजनीतिक दलों पर अपने बेबाक विचार साझा किए हैं।
शायर और बाग़ी तेवर
नदीम फारुख का मानना है कि शायर केवल आशिक नहीं बल्कि समाज का एक बागी होता है। उन्होंने बताया कि किस तरह से देश की मिट्टी और यहाँ की संस्कृति नफरत को लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करती।
- शायर के अंदर असल में एक बागी छिपा होता है।
- देश की जनता लंबे समय तक नफरत और कट्टरता को स्वीकार नहीं करती।
- बदलाव रातों-रात नहीं आता, इसके पीछे लंबी प्रक्रिया होती है।
राजनीति और नरेटिव की लड़ाई
उन्होंने देश की राजनीति में पिछले एक दशक से चल रहे नैरेटिव और हेडलाइन मैनेजमेंट पर भी रोशनी डाली। उनके अनुसार देश का युवा अब केवल जुमलों या हेडलाइन से संतुष्ट नहीं होना चाहता, बल्कि वह असल मुद्दों पर बात करना चाहता है।
- सियासत में 'नरेटिव बिल्डिंग' और 'हेडलाइन मैनेजमेंट' के दो मुख्य काम चल रहे हैं।
- आज की युवा पीढ़ी अब इन पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर जमीनी सवालों के जवाब चाहती है।
योगी सरकार और बुलडोजर नीति
उत्तर प्रदेश की राजनीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि योगी जी एक अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन उनकी कुछ नीतियां और 'बुलडोजर नीति' पर बहस की गुंजाइश है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योगी जी के मठ और कार्यप्रणाली में कई मुस्लिम कर्मचारी भी पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं।
हिंदुस्तान और मजहब
पॉडकास्ट के अंत में नदीम फारुख ने एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया कि मजहब और आस्थाएं इंसानों के दिल में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि माथे पर चाहे जो भी पहचान हो, लेकिन हर नागरिक के सीने में असली हिंदुस्तान धड़कना चाहिए।


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