अयोध्या से एक एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें मंदिर में हाल ही में सामने आए कथित चोरी और घोटालों के मामलों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। द जनपथ न्यूज़ के इस इंटरव्यू में एक श्रद्धालु और एक स्थानीय संत ने मंदिर प्रशासन, एसआईटी जांच और श्रद्धालुओं की आस्था को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है।
श्रद्धालु की दो टूक: 'राम से है रिश्ता, समिति से नहीं'
जम्मू से आए एक श्रद्धालु ने बातचीत में कहा कि मंदिर में जो चोरी हुई है, उसके संदर्भ में सिर्फ इस्तीफा देना काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं का रिश्ता भगवान राम से है, न कि किसी समिति या मंदिर प्रबंधन से।
- मंदिर में आस्था पर भारी चोट पहुंच रही है, क्योंकि भीड़ कम होने के बावजूद व्यवस्थाओं में भारी खामियां हैं।
- सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का गायब होना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।
- श्रद्धालुओं को मंदिर प्रबंधन और समितियों के भ्रष्टाचार से आहत होने के बजाय भगवान राम के प्रति अपनी आस्था अडिग रखनी चाहिए।
दोषियों के लिए कड़ी सजा और पारदर्शिता की मांग
श्रद्धालु ने जोर देकर कहा कि इस मामले में सिर्फ खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए, बल्कि दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके।
- इस पूरे मामले की एसआईटी या सीबीआई द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।
- जांच प्रक्रिया और उसके नतीजे जनता के सामने आने चाहिए ताकि लोगों का विश्वास बहाल हो सके।
- वैष्णो देवी मंदिर ट्रस्ट की तर्ज पर अयोध्या में भी एक पारदर्शी ट्रस्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
संतों की चिंता: एसआईटी और ट्रस्ट की निष्पक्षता पर सवाल
वीडियो में मौजूद एक संत ने भी इस मामले पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि वे एसआईटी जांच पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकते क्योंकि जांच एजेंसी में वही लोग शामिल हो सकते हैं जिनका संबंध प्रशासन और ट्रस्ट से है।
- संतों और अयोध्यावासियों की मांग है कि इस मामले की जांच या तो अदालत के सीधे नियंत्रण में हो या सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की निगरानी में कोई स्वतंत्र जांच कमेटी बैठे।
- प्रशासन और ट्रस्ट के गठजोड़ के कारण निष्पक्ष न्याय की उम्मीद करना मुश्किल है, इसलिए न्यायिक जांच ही एकमात्र विकल्प है।


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