राम नगरी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और चंदे को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सरयू घाट और हनुमान कोटी आश्रम के साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने मंदिर ट्रस्ट और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े ट्रस्ट और प्रशासनिक अधिकारियों के होने के बावजूद इस तरह की चोरी होना पूरी व्यवस्था की नाकामी को दर्शाता है।
स्थानीय संतों और पर्यटकों का मानना है कि चंदा चोरी के इस मामले में केवल छोटे कर्मचारियों या चंपत राय के इस्तीफे से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसकी तह तक निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। संतों का यह भी कहना है कि राम भक्तों ने अपनी गाढ़ी कमाई और श्रद्धा से राम मंदिर के लिए दान दिया था, और इस तरह की घटनाएं भक्तों की आस्था को आघात पहुँचाती हैं।
चंदा चोरी और ट्रस्ट की व्यवस्था पर उठे सवाल
साधु-संतों का आरोप है कि राम मंदिर ट्रस्ट के पास प्रशासनिक अधिकारियों और महात्माओं के होने के बावजूद धन के रख-रखाव में भारी लापरवाही बरती गई। संतों के अनुसार:
- ट्रस्ट की प्रबंधन व्यवस्था पूरी तरह खराब और मनमानी से भरी रही है।
- चंदे में मिले सोने-चांदी के आभूषणों और ईंटों का कोई पारदर्शी हिसाब या रसीद दानकर्ताओं को नहीं दी गई।
- चंपत राय के इस्तीफे और खुले पत्र के बाद भी कई बड़े सच सामने आना बाकी हैं।
एसआईटी जांच और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर अविश्वास
संतों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा गठित एसआईटी या प्रशासनिक एजेंसियों की जांच पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि उनमें भी वही प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं जो ट्रस्ट से जुड़े हैं।
- संतों की मांग है कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित निष्पक्ष समिति या सीबीआई द्वारा की जानी चाहिए।
- मंदिर के खातों और दान की गई सामग्री का दूध का दूध और पानी का पानी तभी होगा जब उच्च स्तर पर पारदर्शी जांच हो।
राम भक्तों की आस्था को लगा गहरा आघात
अयोध्या में दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं का कहना है कि इस घटना से देश भर के राम भक्तों की भावनाओं को ठेस पहु पहुँची है।
- भक्तों का रिश्ता भगवान राम से है, न कि किसी समिति या मंदिर ट्रस्ट से।
- घटना के बाद से अयोध्या आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी असर पड़ा है और लोगों में अविश्वास का माहौल है।


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