अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर बड़े विवाद खड़े हो रहे हैं। राम मंदिर में चंदा चोरी और कुव्यवस्था के मामलों से देश के रामभक्तों के साथ-साथ स्थानीय संतों में भी गहरा आघात और आक्रोश देखा जा रहा है।
इसी सिलसिले में 'द जनपथ न्यूज़' से खास बातचीत में हनुमान कोटी आश्रम के राममोहन दास ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आज की तारीख में संतों और जनता का मंदिर ट्रस्ट से भरोसा उठ चुका है।
ट्रस्ट की पूरी प्रबंधन व्यवस्था पर उठे सवाल
संत राममोहन दास ने आरोप लगाया कि राम मंदिर ट्रस्ट की पूरी मैनेजमेंट व्यवस्था ही पूरी तरह से खराब और मनमानी से भरी है। इतने बड़े ट्रस्ट में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और विशिष्ट महात्मा होने के बावजूद व्यवस्था एक व्यक्ति के हाथ में केंद्रित कर दी गई है।
- ट्रस्ट में कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और महात्मा शामिल हैं।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार केंद्र सरकार ने इसे अपने अधिकार में लिया था।
- बावजूद इसके सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक से नहीं हुआ और एक ही व्यक्ति पर दारोमदार रख दिया गया।
- संगठन के बजाय एक व्यक्ति के अधिकार में आते ही मनमानी शुरू हो जाती है।
चंपत राय के इस्तीफे और 'सच बाहर आने' पर प्रतिक्रिया
चंपत राय द्वारा दिए गए इस्तीफे और उनके उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि 'अभी सच बाहर आना बाकी है', संत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अपना बचाव करने के लिए मगरमच्छ और मछलियों जैसी बातें कर रहे हैं और छोटे-छोटे लोगों को फंसाया जा रहा है।
संत ने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी ऋषिकेश उपाध्याय और महिपाल जैसे कर्मचारियों के मामलों में मनमानी की गई और शिकायतों के बावजूद गंभीर कार्रवाई नहीं की गई।
चंदे की रसीद और ऑडिट पर पारदर्शिता की मांग
चंदे में मिले सोने, चांदी और अन्य आभूषणों को लेकर संतों ने ट्रस्ट से कड़े सवाल पूछे हैं। संतों का कहना है कि जब भक्तों ने अपनी श्रद्धा से दान दिया था, तो ट्रस्ट को उसका हिसाब और रसीद देनी चाहिए थी।
- मंदिर निर्माण के लिए हजारों-लाखों भक्तों ने अपनी गाढ़ी कमाई और गहने दान किए।
- ट्रस्ट के नियमों के अनुसार दानदाताओं को रसीद मिलने का प्रावधान होना चाहिए था।
- सिंधी समाज द्वारा दी गई 200 किलो चांदी और अन्य दानों का कोई स्पष्ट और संतोषजनक हिसाब सामने नहीं आया है।
न्यायिक या सीबीआई जांच की मांग
संत राममोहन दास ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार गठित विशेष जांच समिति या सीबीआई जांच नहीं कराई जाती, तब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो सकता।
उन्होंने अंत में कहा कि आज स्थानीय निवासी और संत इस पूरी व्यवस्था के साक्षी रहे हैं, लेकिन उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। यदि बड़े संत और महात्मा खुलकर सामने आएं, तो यह पूरा सच और भ्रष्टाचार देश के सामने आ जाएगा।


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