दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 23 दिनों से पेपर लीक के खिलाफ चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन और छात्रों के अनशन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
आप नेताओं ने बताया कि पिछले 20 दिनों से जंतर-मंतर पर धरना और अनशन चल रहा था, जिसमें अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक जैसे लोग शामिल थे। छात्रों की मांग थी कि पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, लेकिन सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने उनसे बात करने की जहमत नहीं उठाई।
शांतिपूर्ण आंदोलन पर क्रूर कार्रवाई
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दफ्तर से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर चल रहे इस शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के लिए क्रूरता का सहारा लिया गया।
- पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवाओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया।
- प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
- देश की राजधानी दिल्ली में युवाओं के साथ दुश्मन देश के नागरिकों जैसा व्यवहार किया गया।
- छात्रों के इस विरोध प्रदर्शन को अवैध और 163 लागू होने की झूठी खबरें फैलाकर बदनाम करने की कोशिश की गई।
सत्ता का अहंकार और दमनकारी नीतियां
आप नेताओं ने कहा कि सत्ता का अहंकार लंबे समय तक नहीं टिकता। प्रधानमंत्री मोदी को यह समझ लेना चाहिए कि नौजवान जाग चुका है और दिल्ली में हुआ यह दृश्य उनकी सत्ता के लिए एक बहुत बड़ा संकेत है।
पार्टी ने दावा किया कि यदि युवाओं की मांगों और बातों को नहीं सुना गया, तो यही नौजवान उनकी सत्ता को उखाड़ कर फेंक देंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि इस आंदोलन के दौरान कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत में लिया गया है।
आंदोलन में शामिल प्रमुख नेता
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस और पूरे घटनाक्रम के दौरान आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेता और कार्यकर्ता छात्रों के समर्थन में नजर आए।
- संजय सिंह
- आतिशी
- दुर्गेश पाठक
- गोपाल राय
- सौरभ भारद्वाज
- संजू झा
- कुलदीप और मनीष सिसोदिया सहित अन्य कई कार्यकर्ता


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