शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
The Janpath News
दिल्ली में हर तीसरा वोटर, लिस्ट से बाहर ! आखिर कहां गए 47.56 लाख नाम ?
देश

दिल्ली में हर तीसरा वोटर, लिस्ट से बाहर ! आखिर कहां गए 47.56 लाख नाम ?

शेयर f X

Delhi SIR: दिल्ली में Special Intensive Revision (SIR) के बाद जारी हुई ड्राफ्ट मतदाता सूची ने बड़ा राजनीतिक और चुनावी सवाल खड़ा कर दिया है। SIR से पहले दिल्ली की मतदाता सूची में 1 करोड़ 45 लाख 10 हजार 299 मतदाता दर्ज थे, जबकि नई ड्राफ्ट सूची में 97 लाख 53 हजार 577 मतदाता शामिल हैं। यानी 47 लाख 56 हजार 722 नाम फिलहाल ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं। यह संख्या कुल पंजीकृत मतदाताओं की करीब 32.8 प्रतिशत है। आसान शब्दों में कहें तो दिल्ली का लगभग हर तीसरा रजिस्टर्ड मतदाता ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर है।

हालांकि इस आंकड़े का अर्थ यह नहीं है कि 47.56 लाख पात्र मतदाताओं के वोट स्थायी रूप से काट दिए गए हैं। यह अभी Draft Electoral Roll है, अंतिम मतदाता सूची नहीं। यही फर्क इस पूरी खबर में सबसे महत्वपूर्ण है। जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट में नहीं आए हैं, उनमें अलग-अलग श्रेणियों के मतदाता शामिल हैं और पात्र लोगों को दावा करने का अवसर दिया गया है।

47.56 लाख नामों के पीछे क्या है गणित?

ड्राफ्ट सूची से बाहर नामों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या आखिर बनी कैसे? उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 2 लाख 82 हजार 412 मतदाता मृत पाए गए, जबकि करीब 1 लाख 41 हजार 535 एंट्री डुप्लीकेट बताई गई हैं।

लेकिन सबसे बड़ा आंकड़ा इन दोनों श्रेणियों का नहीं है। करीब 43 लाख 32 हजार 775 मतदाता permanently shifted, absent अथवा unverified जैसी श्रेणियों में बताए गए हैं। यही वह आंकड़ा है जो आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है।

सवाल यह है कि इन 43 लाख से ज्यादा लोगों में कितने वास्तव में दिल्ली छोड़ चुके हैं और कितने ऐसे पात्र मतदाता हैं जो सत्यापन के दौरान अपने पते पर नहीं मिले या जिनका Enumeration Form किसी वजह से जमा नहीं हो पाया?

दिल्ली की प्रवासी आबादी के कारण बढ़ता है सवाल

दिल्ली की आबादी का एक बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों से आकर यहां रहने वाले लोगों का है। उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिम बंगाल सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग रोजगार, कारोबार और पढ़ाई के लिए दिल्ली आते हैं। इनमें बड़ी संख्या किराये के मकानों में रहने वालों की भी है।

ऐसे में पता बदलने के बावजूद मतदाता सूची में पुराना पता बने रहने जैसी परिस्थितियां verification को मुश्किल बना सकती हैं। पुराने पते पर मतदाता नहीं मिलने पर उसके सत्यापन में समस्या पैदा हो सकती है।

केजरीवाल का चुनाव आयोग पर तंज

ड्राफ्ट मतदाता सूची सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर तीखा तंज किया।

केजरीवाल ने दिल्ली के करीब डेढ़ करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को जनसंख्या को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है और SIR के जरिए चुनाव आयोग देश की आबादी को “140 करोड़ से घटाकर 50 करोड़” कर देगा।






केजरीवाल का बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल न होने से SIR अब प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ राजनीतिक मुद्दा भी बनता दिखाई दे रहा है।

AAP इससे पहले भी दिल्ली में पूर्वांचली और migrant voters का मुद्दा उठा चुकी है। पार्टी विधायक संजीव झा ने आशंका जताई थी कि बिहार और उत्तर प्रदेश से दिल्ली आए प्रवासी तथा विशेष रूप से पूर्वांचली मतदाता इस प्रक्रिया में प्रभावित हो सकते हैं। AAP ने unauthorized colonies और JJ clusters में रहने वाले मतदाताओं को लेकर भी सवाल उठाए थे। हालांकि ये AAP के राजनीतिक आरोप हैं, स्थापित तथ्य नहीं।

रोहिणी से तुगलकाबाद तक बड़ा अंतर

विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़े भी कई सवाल पैदा करते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार रोहिणी में Enumeration Forms की digitisation करीब 83.43 प्रतिशत रही, जबकि तुगलकाबाद में यह करीब 52.15 प्रतिशत रही।

ओखला में करीब 45.32 प्रतिशत forms uncollectable category में बताए गए। चांदनी चौक में यह आंकड़ा करीब 38.98 प्रतिशत, बल्लिमारान में 32.65 प्रतिशत, मुस्तफाबाद में 28.09 प्रतिशत, बाबरपुर में करीब 27 प्रतिशत, मतिया महल में 24.50 प्रतिशत और सीलमपुर में करीब 23.37 प्रतिशत बताया गया है।

अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के बीच इतना अंतर क्यों है, इसका अंतिम निष्कर्ष अभी निकालना जल्दबाजी होगी। Migration, पुराने पते, किरायेदार आबादी या verification से जुड़ी दूसरी वजहें इसकी संभावित व्याख्या हो सकती हैं, लेकिन अंतिम तस्वीर claims और objections की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

कांग्रेस ने भी उतारे बूथ लेवल एजेंट

कांग्रेस भी दिल्ली की SIR प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव पहले कह चुके हैं कि पार्टी ने 13 हजार से ज्यादा booth-level agents सक्रिय किए हैं ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से न हटे।

इस तरह दिल्ली में SIR को लेकर तीन स्तर पर बहस बन रही है—चुनाव आयोग मतदाता सूची के सत्यापन और शुद्धिकरण की प्रक्रिया चला रहा है, विपक्ष पात्र मतदाताओं के छूटने की आशंका जता रहा है और अब लाखों मतदाताओं के सामने अपना नाम जांचने की चुनौती है।

Voter ID है तो भी जरूर जांचें नाम

दिल्ली के मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल Voter ID Card हाथ में होना पर्याप्त नहीं है। मतदान के लिए मतदाता का नाम electoral roll में होना जरूरी है।

ड्राफ्ट सूची में जिन पात्र मतदाताओं का नाम नहीं है, उनके लिए 31 अगस्त से 30 सितंबर तक claims और objections की प्रक्रिया है। नाम शामिल कराने के लिए पात्र मतदाता Form 6 और आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकते हैं। वहीं नाम, पता, उम्र अथवा अन्य विवरण में सुधार के लिए Form 8 का इस्तेमाल किया जा सकता है।

Claims और objections के निस्तारण की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। इसके बाद 4 नवंबर 2026 को दिल्ली की Final Electoral Roll प्रकाशित होनी है।

असली परीक्षा 4 नवंबर को

4 नवंबर को आने वाली अंतिम मतदाता सूची ही बताएगी कि ड्राफ्ट सूची से बाहर 47.56 लाख नामों में से कितने पात्र मतदाता दावा करने के बाद वापस शामिल होते हैं।

अगर बड़ी संख्या में नाम वापस जुड़ते हैं तो सवाल उठ सकता है कि verification के दौरान इतने पात्र मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर कैसे रह गए। दूसरी ओर, अगर इनमें से बहुत कम नाम वापस आते हैं तो सवाल होगा कि दिल्ली की पुरानी मतदाता सूची में shifted, deceased और duplicate जैसी इतनी बड़ी संख्या में entries कैसे बनी हुई थीं।

इसलिए फिलहाल दो निष्कर्षों से बचना जरूरी है—यह कहना सही नहीं होगा कि 47 लाख “फर्जी वोटर” पकड़े गए हैं और यह कहना भी सही नहीं होगा कि 47 लाख पात्र मतदाताओं के वोट स्थायी रूप से काट दिए गए हैं।

लेकिन आंकड़ा इतना बड़ा जरूर है कि सवाल गंभीर है: दिल्ली का लगभग हर तीसरा रजिस्टर्ड मतदाता ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में क्यों नहीं है?

अब नजर 30 सितंबर तक आने वाले claims, उनके निस्तारण और आखिरकार 4 नवंबर की Final Voter List पर होगी। दिल्ली के मतदाताओं के लिए फिलहाल सबसे जरूरी काम यही है—Voter ID देखकर निश्चिंत होने के बजाय नई मतदाता सूची में अपना और अपने परिवार का नाम जरूर जांचें।

 

« होमपेज पर वापस जाएं

0 टिप्पणियाँ

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले टिप्पणी करें।

टिप्पणी लिखें