“The Janpath News” को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ माता के मुद्दे पर तीखा रुख अपनाते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में सनातन और हिंदुत्व के नाम पर सरकारें चल रही हैं, लेकिन इसके बावजूद गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा नहीं मिला है, जिससे धर्म युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं।
साक्षात्कार के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस (RSS) पर भी खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग गाय को पशु कहते हैं, वे सच्चे हिंदू नहीं हो सकते और जब तक देश में कोई सच्चा हिंदू सत्ता में नहीं आता, तब तक गौ माता को उनका वास्तविक सम्मान नहीं मिलेगा।
गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा न मिलने पर सवाल
शंकराचार्य ने देश में सनातन के नाम पर चल रही सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सरकारें खुद को सनातनी और हिंदू हितों की पैरवी करने वाली बताती हैं, तो फिर गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा क्यों नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा:
- वर्तमान सरकारें केवल दिखावे के लिए हिंदुत्व की बात करती हैं।
- अगर वे सच्चे हिंदू होते, तो अब तक गौ माता को 'पशु' की श्रेणी से हटाकर 'माता' का दर्जा दिया जा चुका होता।
- देश में 12 साल से नरेंद्र मोदी और 9 साल से अधिक समय से योगी आदित्यनाथ सत्ता में हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने गौकशी और गाय को पशु कहने की प्रथा को बंद नहीं किया।
असली और नकली हिंदू की परिभाषा
शंकराचार्य ने 'असली' और 'नकली' हिंदू की स्पष्ट परिभाषा देते हुए कहा कि जो लोग वेद शास्त्रों को मानते हैं, गुरुओं का आदर करते हैं और गौ माता को मां मानते हैं, वे ही असली हिंदू हैं। इसके विपरीत:
- जो लोग वेद शास्त्रों और गुरुओं के आदेशों को नकारते हैं, वे नकली हिंदू हैं।
- बीजेपी और आरएसएस के लोग वेद शास्त्रों के अनुसार राम मंदिर का शिलान्यास जैसे कार्य नहीं मानते।
- जो लोग गाय को 'पशु' कहते हैं, उन्हें हिंदू कहने का कोई अधिकार नहीं है।
उत्तर प्रदेश में गायों की घटती संख्या
सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि देश में सबसे तेजी से गायों की संख्या उत्तर प्रदेश में घट रही है। पशुगणना के आंकड़ों के अनुसार:
- उत्तर प्रदेश वह राज्य है जहां गायों की संख्या में सबसे भारी गिरावट दर्ज की गई है।
- राज्य सरकार पशु कल्याण के दावे तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर गायों की स्थिति दयनीय है।
- सरकारी दस्तावेजों में गाय आज भी पशु सूची में दर्ज है, जिसे माता का दर्जा देने से सरकारें बचती रही हैं।
मुसलमानों द्वारा गौहत्या रोकने के निर्णय का स्वागत
साक्षात्कार के दौरान एक बड़ा बयान देते हुए शंकराचार्य ने देश के मुसलमानों के एक फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों देश के सभी मुसलमानों ने मिलकर यह ऐतिहासिक निर्णय लिया कि वे गौहत्या नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया:
- यह निर्णय देश के मुसलमानों की ओर से एक बड़ा कदम था, जिसकी उन्होंने और अन्य संतों ने सराहना की।
- गोवर्धन यात्रा के दौरान खुद आरएसएस ने भी गाय को राष्ट्रपशु घोषित करने की मांग की थी।
- जब मुस्लिम समाज और अन्य संगठन गाय की रक्षा के पक्ष में आ रहे हैं, तो सरकारों को भी आगे आकर कड़े कदम उठाने चाहिए।


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