दिल्ली के जंतर-मंतर पर मानसून सत्र के पहले दिन सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। निर्धारित धरना स्थल पर मंच टूटने के बाद छात्र और प्रदर्शनकारी उससे कुछ आगे आकर सड़क पर बैठ गए और संसद की तरफ मार्च करने पर अड़े रहे।
मौके पर भारी संख्या में दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। आंसू गैस के गोले दागने वाली गाड़ियों और टियर गैस कैनन को भी मौके पर खड़ा किया गया है ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।
छात्रों और प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
प्रदर्शन में शामिल छात्रों और सीजीपी (CGP) के प्रतिनिधियों का हौसला कम नहीं हुआ है और वे अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह डटे हुए हैं। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- सोनम सर्रे को तुरंत रिहा किया जाए।
- मृतक छात्रों के परिवार वालों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
- प्रधान को उनका इस्तीफा देने के लिए कहा जाए।
पुलिस कार्रवाई और बैरिकेडिंग
परिस्थितियों को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं, जिसके तहत कई कदम उठाए गए हैं:
- प्रदर्शन स्थल के आसपास भारी पुलिस बल और RAF की बटालियन तैनात की गई है।
- सड़क पर कई जगहों पर बैरिकेडिंग की गई है और आंसू गैस के गोले छोड़ने वाली गाड़ियां खड़ी हैं।
- छात्रों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस लगातार मुस्तैद नजर आ रही है।
प्रतिनिधिमंडल की बातचीत और अनिश्चितता
छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल की पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ बातचीत भी हुई, लेकिन अभी तक कोई ठोस आश्वासन या समाधान नहीं निकल पाया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी तरह फाइनल और लिखित रूप में नहीं मानी जातीं, तब तक वे जंतर-मंतर और आसपास के इलाके से नहीं हटेंगे और अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।


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