शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
The Janpath News
जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज: घायल छात्र ने सुनाई आपबीती, पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
कानून व्यवस्था

जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज: घायल छात्र ने सुनाई आपबीती, पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज और झड़प के बाद घायल छात्रों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। एक घायल छात्र ने बताया कि कैसे पुलिस और असामाजिक तत्वों ने छात्रों के साथ मारपीट की और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।

शेयर f X

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए लाठीचार्ज के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस घटना में कई युवा और छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जो अब भी अपने दर्द और चोटों से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। द जंतर-मंतर न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट में एक घायल छात्र मयंक ने इस पूरी घटना की दर्दनाक दास्तां बयां की है।

जंतर-मंतर के बाहर कैसे भड़की हिंसा

घायल छात्र मयंक के अनुसार, घटना जंतर-मंतर के बाहर वाले सड़क पर हुई जब छात्र हाथों में पोस्टर लेकर आगे बढ़ रहे थे। वहां अचानक भीड़ को रोक दिया गया और पुलिस स्टेशन के पास से बच्चों और लोगों पर पत्थर गिरने शुरू हो गए।

  • छात्रों के अनुसार, पुलिस ने इस पथराव का मुद्दा यह कहकर बनाया कि बच्चे पत्थरबाजी कर रहे हैं।
  • छात्रों का दावा है कि यह एक पूर्व-नियोजित साजिश थी ताकि छात्रों को हिंसा में फंसाया जा सके।

छात्रों के साथ बर्बरता और मारपीट के आरोप

मयंक ने आरोप लगाया कि पत्थरबाजी शुरू होते ही कुछ लोगों ने छात्रों पर हमला करना शुरू कर दिया और उन्हें बुरी तरह पीटा गया।

  • प्रदर्शन के दौरान छात्रों के बाल खींचकर और कपड़े फाड़कर उन्हें नीचे गिराया गया।
  • लड़कियों और छात्रों के फोन तोड़ दिए गए और उन्हें उठने तक का मौका नहीं दिया गया।
  • मयंक ने बताया कि एक पुलिसकर्मी द्वारा एक लड़की को पीछे से खींचे जाने का विरोध करने पर उसकी उंगलियां तोड़ दी गईं और कंधे पर गंभीर चोट पहुंचाई गई।

लाठीचार्ज और नरेटिव की जंग

छात्रों का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो फैलाए जा रहे हैं जिनमें छात्रों को गाड़ियां तोड़ते और पुलिस को पीटते हुए दिखाया जा रहा है, जो पूरी तरह से एकतरफा और गुमराह करने वाला नरेटिव है।

  • छात्रों का स्पष्ट कहना है कि वे किसी राजनीतिक दल या संगठन के लिए नहीं, बल्कि अपने हक, देश और छात्रों के भविष्य के लिए सड़क पर उतरे थे।
  • घायल छात्र ने यह भी आशंका जताई कि इस तरह की बातचीत और प्रशासन के कदम केवल जनता और कैबिनेट को गुमराह करने का एक तरीका हो सकते हैं।
« होमपेज पर वापस जाएं

0 टिप्पणियाँ

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले टिप्पणी करें।

टिप्पणी लिखें