राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा अपनी पत्नी और पार्टी नेताओं के साथ सुंदरकांड पाठ करने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस कार्यक्रम के बाद पूरे देश में 'हस्ताक्षर अभियान' की शुरुआत की गई है, जिसमें राम मंदिर में चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
इस धार्मिक आयोजन और राजनीतिक गतिविधियों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विभिन्न साधु-संतों ने अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला है और इसे आगामी चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है।
केजरीवाल का सुंदरकांड पाठ और हस्ताक्षर अभियान
आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के साथ एक कार्यक्रम में सुंदरकांड का पाठ किया। इसके साथ ही:
- पूरे देश में हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की गई।
- राम मंदिर में चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सरेआम फांसी की सजा दिलाने की मांग की गई।
- पार्टी ने राम भक्तों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।
बीजेपी का तीखा हमला: 'राजनीतिक हिंदू'
अरविंद केजरीवाल के इस कदम पर बीजेपी ने कड़ा रुख अपनाया है और उन्हें 'राजनीतिक हिंदू' करार दिया है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि:
- केजरीवाल का यह पाठ सिर्फ चुनावी माहौल बनाने का ढोंग है।
- भगवान राम में उनकी कोई सच्ची आस्था नहीं है।
- बीजेपी नेताओं ने उनके पुराने बयानों और राम मंदिर निर्माण के विरोध को याद दिलाते हुए उन पर जमकर निशाना साधा।
साधु-संतों की कड़ी नाराजगी
साधु-संत समाज ने भी अरविंद केजरीवाल के सुंदरकांड पाठ पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे बरसाती मेंढक की तरह चुनावी मौसम में सक्रिय होने वाला ढोंग बताया है। संतों का आरोप है कि:
- केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेताओं ने पहले राम मंदिर के निर्माण का विरोध किया था।
- संतों ने सवाल उठाया है कि जिन्हें अपनी नानी की कहानी और राजनीति के अलावा सनातन से कोई प्रेम नहीं है, वे अचानक राम भक्त कैसे बन गए।


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