महाराष्ट्र विधानसभा में बुधवार को उस समय भारी हंगामा देखने को मिला जब एनसीपी विधायक सना मलिक के एक बयान पर राजनीतिक घमासान मच गया। बीजेपी विधायक देवयानी फरांडे ने विधानसभा में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन तलाक कानून को महाराष्ट्र में लागू करने के संबंध में ध्यान आकर्षण प्रस्ताव पेश किया था। इसी चर्चा के दौरान एनसीपी विधायक सना मलिक ने पाकिस्तान में मौजूद कानूनों का जिक्र करते हुए एक ऐसा बयान दिया जिससे सदन से लेकर बाहर तक तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।
सना मलिक का विवादित बयान और पाकिस्तान का संदर्भ
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान चर्चा में हिस्सा लेते हुए सना मलिक ने कहा कि मुस्लिम समुदाय में मुस्लिम कानून के तहत बहुविवाह की अनुमति है और पाकिस्तान ने कुछ नया नहीं किया बल्कि कुरान में बताए गए मुस्लिम कानून को लागू किया है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तानी सरकार ने कुरान की बातों को लागू करने के लिए कानून बनाया है और भारत को भी ऐसा ही कानून लाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में विरोध के स्वर उठने लगे।
शाइना एनसी ने सना मलिक के बयान को बताया 'पाकिस्तानी सोच'
सना मलिक के इस बयान पर तीखा पलटवार करते हुए नेता शाइना एनसी ने इसे पाकिस्तानी सोच और तालिबानी माइंडसेट करार दिया। उन्होंने कहा कि एक तरफ महिलाओं को सम्मान और जेंडर इक्वलिटी की बात की जाती है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के बयान महिला विरोधी और संविधान की मूल भावना के खिलाफ हैं। शाइना एनसी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का हवाला देते हुए कहा कि भारत में सभी धर्मों के लोगों को समानता मिलनी चाहिए और नए भारत में ऐसी विभाजनकारी सोच के लिए कोई जगह नहीं है।
विवाद बढ़ने पर एनसीपी विधायक सना मलिक की सफाई
अपने बयान पर चौतरफा घिरने के बाद एनसीपी विधायक सना मलिक ने मीडिया के सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की और सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
- सना मलिक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पाकिस्तान का संदर्भ देते हुए यह कहा था कि यदि पाकिस्तान के कानून को आधार बनाकर भारत में कोई कानून थोपने की कोशिश की जाएगी तो वह अस्वीकार्य होगा।
- उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि भारत के संविधान ने हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने, प्रोफैस करने और प्रोपगेट करने का अधिकार दिया है।
- उन्होंने जोर देकर कहा कि वह अपनी कुरानिक स्टडीज और धर्म के हिसाब से बात कर रही थीं और उनके बयान का पाकिस्तान के साथ भारतीय संदर्भ में कोई लेना-देना नहीं है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर अन्य राजनीतिक नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। नेताओं का कहना है कि किसी भी देश के कानूनों का निर्माण सामाजिक न्याय और समानता को ध्यान में रखकर किया जाता है, न कि किसी एक विशेष धार्मिक ग्रंथ को आधार बनाकर। इस विवाद के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में धर्म, कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।


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