मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव का माहौल गहराता जा रहा है। ईरान में सुप्रीम लीडर अली खामनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या एक बार फिर ईरान और अमेरिका के बीच भीषण युद्ध छिड़ेगा। अमेरिका द्वारा ईरान के मिसाइल, ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार साइट्स पर किए गए हवाई हमलों ने इस आशंका को और बढ़ा दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी और सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान नहीं सुधरा तो उसका अस्तित्व ही नहीं बचेगा और अमेरिका को मजबूरन अपने सैन्य अभियान को आगे बढ़ाना पड़ेगा।
ट्रंप के बयानों के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका का यह भी दावा है कि ईरान द्वारा युद्ध विराम तोड़े जाने के कारण ही हालिया सैन्य कार्रवाई की गई है।
- अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों को बनाया निशाना
- तटीय रडार साइट्स पर भी किए गए हवाई हमले
- ट्रंप ने ईरान के अस्तित्व को लेकर दी बड़ी चेतावनी
ईरान का पलटवार और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर बयान
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिकी धमकियों का कड़ा जवाब देते हुए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज अगले 30 दिनों में ठीक उसी तरह खुल जाएगा जैसे जंग से पहले था और ईरान इसमें किसी भी बाहरी देश की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं करेगा।
ईरान ने साफ कर दिया है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का प्रबंधन पूरी तरह से ईरान के तय नियमों के तहत ही होगा। अरागची ने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की दखलंदाजी से इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने में देरी होगी और क्षेत्र में तनाव का स्तर और अधिक बढ़ जाएगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता बड़ा संकट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस तनाव का असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। दुनिया के एक बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।
यदि यह संघर्ष और गहराता है तो इसके वैश्विक स्तर पर कई गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं:
- तेल और गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की आशंका
- पेट्रोल और डीजल महंगे होने से महंगाई का बढ़ना
- वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट आना
- हवाई यात्राओं और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी
- क्षेत्रीय संघर्ष के एक बड़े युद्ध में बदलने का खतरा


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