शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
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मानसून सत्र 2026: पीएम मोदी का संबोधन, अंतरिक्ष उपलब्धियों और स्टार्टअप्स पर खास जोर
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मानसून सत्र 2026: पीएम मोदी का संबोधन, अंतरिक्ष उपलब्धियों और स्टार्टअप्स पर खास जोर

मानसून सत्र 2026 के आरंभ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों, स्टार्टअप्स की सफलता, और ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों पर खुलकर बात की।

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मानसून सत्र 2026 की शुरुआत के साथ ही संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वपूर्ण संबोधन सामने आया है। अपने इस भाषण में प्रधानमंत्री ने देश के विकास कार्यों, युवाओं की क्षमता और वैश्विक पटल पर भारत की मजबूत स्थिति का जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मानसून और मानसून सत्र दोनों अगर सक्रिय हों तो देश और जीवमात्र का कल्याण होता है। उन्होंने सत्र के सकारात्मक और उत्पादक रहने की उम्मीद जताई।

अंतरिक्ष और स्टार्टअप्स में युवाओं का कमाल

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए अंतरिक्ष क्षेत्र में मिली ऐतिहासिक सफलताओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत के युवा अब अंतरिक्ष में भी नई उड़ान भर रहे हैं और देश का झंडा गाड़ रहे हैं।

  • पिछले एक महीने में देश ने अंतरिक्ष क्षेत्र में कई बड़ी सिद्धियां प्राप्त की हैं।
  • अंतरिक्ष मिशन पर जाने वाले स्टार्टअप्स की पूरी टीम की औसत उम्र सिर्फ 28 साल है।
  • विश्व के बहुत कम देशों में इस प्रकार के प्राइवेट साहस देखे गए हैं, जो भारत के युवाओं की क्षमता को दर्शाते हैं।

ऊर्जा संकट और वैश्विक चुनौतियां

संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने दुनिया भर में चल रहे युद्धों और ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ने वाले उनके प्रभावों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के युद्धों के कारण भारत जैसे ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर देशों के लिए संकट पैदा हुआ है।

  • पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, फर्टिलाइज़र और केमिकल्स जैसे हर विषय में कई बाधाएं और संकट आए हैं।
  • इन तमाम बाधाओं के बावजूद भारत 7.7% की ग्रोथ के साथ दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली मेजर इकॉनमी बना रहा।
  • देश ने ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर प्लांट्स जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं।

संसद में सार्थक चर्चा की आवश्यकता

भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने संसद की गरिमा और सार्थक चर्चा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज समय की मांग है कि सदन में राष्ट्रनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा हो।

  • संसद के सदन में बहुत अनुभवी सांसद हैं, जिनके ज्ञान और अनुभव की देश को जरूरत है।
  • तर्क और तथ्य मजबूत होने पर शांत चित्त से भी अपनी आवाज को बुलंद बनाया जा सकता है।
  • सदन की चर्चाओं को समृद्ध बनाते हुए हर विचार को सम्मान देने की परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए।
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