शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
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ईरान और गाजा पर मौलाना कल्बे ज़वाद का बड़ा सवाल, भारत के रुख पर उठाए कई मुद्दे
अंतरराष्ट्रीय राजनीति

ईरान और गाजा पर मौलाना कल्बे ज़वाद का बड़ा सवाल, भारत के रुख पर उठाए कई मुद्दे

एक इंटरव्यू में मौलाना कल्बे ज़वाद ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के निधन और भारत में उनके समर्थन में हुए प्रदर्शनों पर बात की। उन्होंने दुनिया भर की खामोशी और भारत सरकार के रवैये पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

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हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार में मौलाना कल्बे ज़वाद ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के निधन और उसके बाद भारत में हुए रिएक्शन पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि इंसानियत हर इंसान में पाई जाती है और जब किसी पर अन्याय होता है, तो लोगों का दुख स्वाभाविक है।

भारत में ईरान के प्रति भावनाएं और समर्थन

मौलाना ने चर्चा के दौरान बताया कि खामेनेई के निधन के बाद भारत में लोगों का रोना और गुस्सा देखना इस बात का संकेत है कि भारतीय भी भावनात्मक रूप से जुड़ रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब कोई अकारण मारा जाता है और पूरी दुनिया खामोश रहती है, तो आम जनता का दिल पसीजना लाजिमी है।

दुनिया और भारत की चुप्पी पर सवाल

इंटरव्यू में भारत की छवि पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए मौलाना ने कहा कि विदेश में भारत की छवि खराब होने जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गाजा में हजारों बच्चों और महिलाओं की जान गई, तो पूरी दुनिया और भारत सरकार ने खुलकर निंदा क्यों नहीं की।

  • गाजा में हजारों बच्चों और नागरिकों की मौत पर अंतरराष्ट्रीय चुप्पी।
  • विभिन्न देशों में हुए हमलों और मौतों पर चुनिंदा बयानों की आलोचना।
  • इतिहास में हुए हमलों और करप्शन के खिलाफ चुप्पी को सबसे बड़ा अपराध बताना।

इमाम हुसैन की शहादत और मानवीय संवेदना

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मौलाना कल्बे ज़वाद ने इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत का जिक्र किया और कहा कि आज भी लोग उनके गम में आंसू बहाते हैं। उन्होंने कहा कि इंसानियत का तकाजा यही है कि जहां भी ظلم हो, उसके खिलाफ आवाज उठाई जाए और मौन धारण करने वाले भी अप्रत्यक्ष रूप से अपराध में शामिल होते हैं।

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