उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के थाना तितावी क्षेत्र के मांडी गांव में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए एक फैक्ट्री से 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया है। इस सनसनीखेज मामले ने देश की राजनीति और मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी फैक्ट्री मालिक और उसके सुपरवाइजर विभिन्न राज्यों से रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों से भोले-भाले मजदूरों को अच्छी सैलरी, खाना और रहने का लालच देकर फैक्ट्री में लाए थे।
मुक्त कराए गए मजदूरों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए जो खुलासे किए, वे किसी भी सभ्य समाज को झकझोर देने वाले हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं ने इस अमानवीय घटना की कड़ी निंदा करते हुए सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है।
कैसे बनता था बंधुआ मजदूरों को शिकार?
आरोपियों ने मजदूरों को अपने चंगुल में फंसाने के लिए एक सुनियोजित जाल बिछाया था:
- मजदूरों को 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन, भोजन और रहने की सुविधा का लालच दिया जाता था।
- विभिन्न राज्यों (बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और राजस्थान) से रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों से मजदूरों को लाया जाता था।
- फैक्ट्री में लाने के बाद उनके मोबाइल फोन रख लिए जाते थे और बाहरी दुनिया से उनका संपर्क पूरी तरह काट दिया जाता था।
फैक्ट्री के अंदर अमानवीय प्रताड़ना और टॉर्चर
फैक्ट्री के अंदर मजदूरों को न केवल बंधक बनाकर रखा गया, बल्कि उन पर भयानक जुल्म ढाए गए:
- मजदूरों से दिन में 15 से 20 घंटे जबरन काम कराया जाता था।
- खाने के नाम पर दिन में सिर्फ एक बार सूखी रोटी (चोकर की रोटी) और कभी-कभी मवेशियों का चारा दिया जाता था।
- सैलरी मांगने या बाहर जाने की जिद करने पर गर्म रॉड, डंडों और फैन बेल्ट से बेरहमी से पीटा जाता था।
- कई मजदूरों के शरीर पर गंभीर चोटों और हड्डियों के टूटने के निशान पाए गए हैं।
पिटबुल कुत्तों का खौफ और भागने की पाबंदी
मजदूरों को अपनी गिरफ्त में रखने के लिए खूंखार तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था:
- फैक्ट्री परिसर में दो पिटबुल कुत्ते छोड़े गए थे, ताकि कोई भी मजदूर भागने की कोशिश न कर सके।
- यदि कोई भागने की कोशिश करता, तो उन पर कुत्ते छोड़ दिए जाते थे या धारदार हथियारों से डराया जाता था।
- बीमार होने पर भी किसी भी मजदूर को कोई चिकित्सीय सहायता या इलाज नहीं दिया जाता था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और पुलिस कार्रवाई
इस वीभत्स घटना के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है:
- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसे 'एक धराशायी हुई अर्थव्यवस्था का मलबा' और मानवीय गरिमा पर हमला बताया है।
- कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
- पुलिस ने मांडी गांव स्थित फैक्ट्री पर छापा मारकर 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर गहन पूछताछ शुरू कर दी है।


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