लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी ने अपने दो साल पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उनके संसदीय कार्यकाल के प्रमुख मुद्दों और गतिविधियों को दिखाया गया है।
इस वीडियो के सामने आने के बाद देश की सियासत में पारा चढ़ गया है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। बीजेपी के कई नेताओं ने राहुल गांधी के बयानों और विदेशी दौरों को लेकर उन पर जमकर निशाना साधा है।
राहुल गांधी द्वारा जारी किया गया रिपोर्ट कार्ड
राहुल गांधी ने अपने दो साल पूरे होने पर एक वीडियो और एक पोस्ट के जरिए अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखा है। उनके पोस्ट और वीडियो के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में दो साल पूरे होने पर हर भारतीय की आवाज को सत्ता तक पहुंचाना मुख्य काम रहा।
- वीडियो में पिछले दो वर्षों के दौरान संसद में दिए गए भाषणों के अंश शामिल किए गए हैं।
- इसमें मणिपुर हिंसा, अग्निवीर योजना, पेपर लीक, NEET के छात्रों के मुद्दे और कथित वोट चोरी जैसे विषय उठाए गए हैं।
- वीडियो में अलग-अलग वर्गों के लोगों, छात्रों, किसानों और श्रमिकों से उनकी मुलाकातों को भी दिखाया गया है।
- राहुल गांधी ने कहा कि सड़क से संसद तक जनता का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और वे हमेशा उनकी लड़ाइयां लड़ते रहेंगे।
बीजेपी नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं
राहुल गांधी के इस वीडियो और पोस्ट के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उन पर कड़े हमले किए हैं। बीजेपी नेताओं के प्रमुख बयान इस प्रकार हैं:
- हरियाणा सरकार में मंत्री अनिल विज ने राहुल गांधी के बयानों को लोगों को भड़काने वाला बताया।
- केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा ने कहा कि राहुल गांधी विदेश जाकर देश को बदनाम करने का काम करते हैं और उनकी संवेदनशीलता देश के प्रति ठीक नहीं है।
- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राहुल गांधी को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि वे लगातार ऐसे बयान देते रहते हैं।
सियासी तापमान और बढ़ता विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है। एक तरफ कांग्रेस अपने नेता के संसदीय कार्यकाल को जनता से जुड़ा और मुद्दा-आधारित बता रही है, तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी उनके बयानों और विदेश यात्राओं को लेकर लगातार सवाल उठा रही है। राहुल गांधी का यह वीडियो केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच जुबानी जंग को तेज कर दिया है।


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