छत्तीसगढ़ में 'द जनपथ न्यूज़' की एंकर शाज़िया निसार के साथ एक विशेष साक्षात्कार में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने देश के प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय व्यक्त की। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन, चंदा विवाद और गौ माता को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देने जैसे संवेदनशील विषयों पर विस्तार से विचार रखे।
साक्षात्कार के दौरान शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल या विपक्ष के प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि वे सनातन धर्म, वेद-शास्त्रों और सनातनी जनता के सिद्धांतों की बात कर रहे हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट और चंदा विवाद पर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना
राम मंदिर निर्माण और ट्रस्ट से जुड़े विवादों के बारे में पूछे जाने पर शंकराचार्य ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में निम्नलिखित तर्क दिए:
- ट्रस्ट का निर्माण: वर्ष 2020 में संसद में प्रधानमंत्री ने स्वयं घोषणा कर ट्रस्ट का निर्माण किया था और बिना किसी व्यापक परामर्श के अपनी पसंद के लोगों को ट्रस्टी बनाया था।
- मूल पक्षकारों की उपेक्षा: जिन लोगों और धर्माचार्यों ने दशकों तक अदालत में मुकदमा लड़कर राम जन्मभूमि का केस जीता, उन्हें ट्रस्ट से अलग कर दिया गया।
- पारदर्शिता का अभाव: मंदिर प्रबंधन और चंदे की व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं है और इसे पूरी तरह सरकारी व संस्थागत रूप दे दिया गया है।
गौ माता को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा और योगी सरकार पर सवाल
गौ संरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए शंकराचार्य ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जो सरकारें खुद को सनातनी और हिंदूवादी कहती हैं, वे भी गौ माता को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देने में विफल रही हैं।
उन्होंने कहा कि:
- सरकारी दस्तावेजों में पशु दर्जा: उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य राज्यों के सरकारी रिकॉर्ड में आज भी गाय को 'पशु' की श्रेणी में रखा गया है।
- नेताओं का दोहरा रवैया: मंच पर भाषण देते समय गाय को माता कहना और दफ्तरी बैठकों व बजट में उसे पशु सूची में रखना नेताओं के दोहरे चरित्र को दिखाता है।
- 81 दिनों की यात्रा: शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों में 81 दिनों की यात्रा कर 18 लाख से अधिक लोगों को गौ रक्षा और गौ माता को राष्ट्रमाता बनाने के संकल्प से जोड़ा।
विपक्ष की भाषा बोलने के आरोप पर सफाई और अखिलेश यादव पर विचार
विपक्ष का मोहरा बनने या उनकी भाषा बोलने के आरोपों को खारिज करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि उनका किसी भी राजनीतिक पार्टी से गठबंधन नहीं है। जब समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव का जिक्र हुआ, तो उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने अतीत में संतों पर हुई लाठीचार्ज की घटना के लिए मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगी थी। शंकराचार्य के अनुसार, सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करना और क्षमा मांगना एक गुण है, जिसकी सराहना की जानी चाहिए।
सनातनी समाज के लिए शंकराचार्य का संदेश
साक्षात्कार के अंत में शंकराचार्य ने देश के सनातनी समाज को जागरूक रहने की सलाह दी:
- आचरण की परीक्षा लें: किसी भी नेता के केवल बयानों और वेशभूषा पर भरोसा न करें, बल्कि उनके वास्तविक आचरण की जांच करें।
- हनुमान जी से प्रेरणा लें: रामायण के प्रसंग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सीता जी ने साधु का वेश देखकर रावण पर विश्वास किया और कष्ट झेला, जबकि हनुमान जी ने कालनेमि के आचरण को देखकर उसकी सच्चाई पहचानी। जनता को भी हनुमान जी की तरह आचरण देखकर परखना चाहिए।
- प्रामाणिक धर्म शिक्षा: सनातन धर्म की सही शिक्षा राजनीतिज्ञों के बजाय प्रामाणिक धर्माचार्यों और वेद-शास्त्रों से प्राप्त करें।


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