हाल ही में राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर धरने पर बैठने और विपक्षी एकजुटता के मुद्दों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजीव झा ने एक इंटरव्यू में इस पूरे घटनाक्रम और विपक्ष की रणनीति पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि इस 30 दिन के आंदोलन में देश के युवाओं का भविष्य दांव पर है, लेकिन विपक्षी दलों के रुख और राहुल गांधी के रवैये को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं।
संजीव झा ने कहा कि जब जंतर-मंतर पर लाखों की संख्या में लोग और युवा अपनी भविष्य की सुरक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं, तो राहुल गांधी का अलग से चलना या जंतर-मंतर पर आकर संबोधित न करना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि संसद या अन्य जगहों पर समानांतर विरोध प्रदर्शन करने से आंदोलन कमजोर होता है और इसका फायदा अंततः भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिलता है।
राहुल गांधी के जंतर-मंतर पर न पहुंचने पर उठे सवाल
AAP नेता ने कहा कि जब 20 मार्च को दिल्ली की सड़कों पर 4 से 5 लाख लोग मौजूद थे, तब राहुल गांधी वहां क्यों नहीं दिखे? उन्होंने तर्क दिया कि:
- जब एक ही मुद्दे पर आंदोलन चल रहा है, तो संसद में विरोध के साथ-साथ मुख्य मंच पर भी एकजुटता दिखानी चाहिए।
- समानांतर विरोध प्रदर्शन करने से लोगों का ध्यान भटकता है और आंदोलन कमजोर होता है।
- अगर राहुल गांधी जंतर-मंतर पर आकर जनता की मांग का समर्थन करते, तो विपक्ष की एकजुटता और मजबूत दिखती।
AAP और विपक्ष की संयुक्त रणनीति की जरूरत
संजीव झा का मानना है कि विपक्ष को अपनी व्यक्तिगत राजनीति से ऊपर उठकर जनता के मुद्दों पर एक मंच पर आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि:
- इस आंदोलन से जुड़ा नुकसान सिर्फ किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष और जनता का हो रहा है।
- क्रेडिट की लड़ाई छोड़कर सभी विपक्षी दलों को युवाओं और छात्रों की आवाज के साथ खड़ा होना चाहिए।
- जनतंत्र में अहंकार या व्यक्तिगत राजनीतिक हितों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
जेन-जी (Gen-Z) युवाओं का आंदोलन और राजनीतिक पार्टियों की भूमिका
संजीव झा ने स्पष्ट किया कि यह पूरा आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के जेन-जी युवाओं और नौजवानों का है जो अपनी भविष्य की सुरक्षा के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि:
- आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल हमेशा से इन युवाओं के जायज मुद्दों के साथ खड़े रहे हैं और अंतिम सांस तक खड़े रहेंगे।
- देश के नौजवानों ने अब ठान लिया है कि वे नेताओं के अहंकार और नफरत की राजनीति को खत्म करेंगे।
- युवाओं के इस आंदोलन में कोई भी बाधा या साजिश कामयाब नहीं होगी और जंतर-मंतर पर बैठे युवा ही इन अहंकारों को तोड़ेंगे।


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