शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT जांच पर उठे सवाल, बार एसोसिएशन ने की CBI जांच की मांग
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT जांच पर उठे सवाल, बार एसोसिएशन ने की CBI जांच की मांग

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने SIT जांच पर असंतोष जताते हुए मामले को CBI को सौंपने की मांग की है और ट्रस्ट के सदस्यों पर भी सवाल खड़े किए हैं।

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला अब सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इस मामले में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भी सवालों के घेरे में आ गया है। पुलिस की जांच एक तरफ आगे बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ फैजाबाद बार एसोसिएशन ने ट्रस्ट के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। इस पूरे घटनाक्रम में गिरफ्तारियों और पूछताछ का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे मामले में नया मोड़ आ गया है।

फैजाबाद बार एसोसिएशन का बड़ा ऐलान और CBI जांच की मांग

फैजाबाद बार एसोसिएशन ने खुलकर मैदान में उतरते हुए मांग की है कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। एसोसिएशन का कहना है कि केवल SIT जांच से लोगों का भरोसा नहीं बन पा रहा है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए।

  • एसोसिएशन ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक इन लोगों को अयोध्या छोड़ने की अनुमति न दी जाए।
  • बार एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि यदि सीबीआई जांच का आदेश नहीं होता है, तो वे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर CBI जांच की मांग करेंगे।
  • एसोसिएशन के मुताबिक, आरोपियों के बचाव में कोई भी अधिवक्ता वकालतनामा दाखिल नहीं करेगा।

पुलिस कार्रवाई और अब तक की गिरफ्तारियां

अयोध्या पुलिस ने ट्रस्ट के सदस्य चंपत राय को नोटिस देकर पूछताछ की है और आने वाले दिनों में अनिल मिश्रा और गोपाल राव से भी पूछताछ हो सकती है। इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच एजेंसियां मामले की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई हैं।

  • इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
  • गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकूल्य मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, राम शंकर मिश्रा, सुभाष् श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिल्लू यादव शामिल हैं।
  • पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई का एक पक्ष समर्थन कर रहा है, तो दूसरा पक्ष आरोप लगा रहा है कि जांच में अभी तक पूरी तस्वीर सामने नहीं आ पा रही है।

संत समाज की प्रतिक्रिया और आगे की राह

संत समाज और हिंदू जनमानस में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक ही सीमित रहेगी या ट्रस्ट से जुड़े कुछ और लोग भी जांच के दायरे में आएंगे। संतों का कहना है कि अगर कोई दोषी है तो उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए और कानूनी कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।

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